पुलकसागर महाराज बोले—बेटियां ससुराल को स्वर्ग बना लें तो तीर्थ जाने की जरूरत नहीं
पुलकसागर महाराज ने बेटियों और परिवार के संस्कारों पर प्रवचन दिए। चित्रकूटधाम में 30 अगस्त तक रोज ज्ञान गंगा महोत्सव जारी रहेगा।
तस्वीर में महोत्सव के दौरान दीप प्रज्वलित करते पुरुष, ध्वज लिए महिलाएं और पंडाल में बैठे श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।
राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि लड़का एक जिंदगी में एक जीवन जीता है, जबकि लड़कियां एक जिंदगी में दो जीवन जीती हैं। एक जीवन मायके में और दूसरा ससुराल में। बेटियां यदि अपने ससुराल को सुंदर और स्वर्ग बनाने का संकल्प लें तो वह घर तीर्थ बन जाएगा और उन्हें सम्मेदशिखर या वैष्णवदेवी जैसे तीर्थों पर जाने की जरूरत नहीं रहेगी।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज ने शुक्रवार को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर, शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में परिवार में बेटियों के महत्व पर प्रवचन दिए। उनकी पुलक वाणी सुनने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि जो बेटियां ससुराल में मायके के अंदाज में जीती हैं, उनका जीवन बिगड़ जाता है। बेटियों को ससुराल को स्वर्ग बनाना है तो अहंकार कम करना होगा। वहीं, माता-पिता को भी उस सोच का त्याग करना होगा, जिसमें बेटियों से कहा जाता है कि ससुराल में किसी से डरना या दबना मत। इस सोच से बेटियों का घर उजड़ रहा है और ऐसा होने पर माता-पिता भी चैन से नहीं रह पाएंगे। उन्हें समझाएं कि शादी के बाद अब वहीं उनका घर है।
उन्होंने कहा कि विवाहित बेटियों को भी ध्यान रखना चाहिए कि ससुराल की समस्याओं का रोना मायके में रोने से इज्जत कम होगी। मान-सम्मान बनाए रखना है तो वहां की समस्याओं का समाधान वहीं ढूंढना पड़ेगा। बेटियां समस्याओं को अपनी ताकत बनाना सीखें।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिस संस्कृति में यह कहा जाता है कि बेटी की डोली पीहर से और अर्थी ससुराल से उठती है, वहां उसे तलाक के लिए नहीं उकसाना चाहिए। जिसे सबमें खराबी नजर आए, समझ लेना चाहिए कि उसमें ही खराबी है। सास-बहू एक-दूसरे को पराई मानने की बजाय मां-बेटी के समान प्यार करें। सास बहू को इतना प्यार दे कि वह मायके के मोबाइल नम्बर भूल जाए, फिर घर को स्वर्ग बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि बेटियां ससुराल को अपना मानेंगी तो ससुरालवाले भी उन्हें पलकों पर रखेंगे। शादी के बाद बेटियों का सम्मान मायके में नहीं, ससुराल में होता है।
आचार्य पुलकसागर ने कहा कि पैसे से अधिक महत्व संस्कारों का है और संस्कार हमारे आचरण, खानपान और जीवनशैली में दिखाई देने चाहिए। बच्चों को सुविधाएं देने से अधिक जरूरी संस्कार देना है। बच्चों से लाड़-प्यार करें, लेकिन इतना भी नहीं कि उनका भविष्य बर्बाद हो जाए।
उन्होंने कहा कि बेटियां खेलने की चीज नहीं हैं, उन्हें खिलौना बनाकर नहीं रखना चाहिए। बचपन से देवी बनाया तो वह लोगों के हृदय में स्थान बनाएगी। बेटियों को अच्छी शिक्षा प्रदान करें, लेकिन इतना भी मॉर्डन नहीं बनाएं कि वह 30 साल की हो जाएं और शादी नहीं करना चाहें। उनकी उम्र जितनी अधिक होती जाएगी, ससुराल में एडजस्ट करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा। उज्ज्वल भविष्य डिग्री से नहीं, अच्छे नेचर से बनता है।
आचार्यश्री ने कहा कि हम खुद को छोड़कर सबको बदलना चाहते हैं, इसलिए कोई नहीं बदलता। कोई किसी को नहीं बदल सकता, जब तक वह खुद बदलना न चाहे। खुद को बदल लिया तो परिवार के साथ जीने में आनंद आ जाएगा। जीवन जीने का थोड़ा सा एंगल बदल लिया जाए तो दुखी जीवन भी सुखी बन सकता है।
उन्होंने कहा कि जिंदगी का गणित उलटा होता है। जो दुनिया से नजर हटा लेता है, उस पर दुनिया की नजर टिक जाती है। जिंदगी को संवार लें तो मौत भी संवर जाएगी। पलकें झुकाकर जिएं, दुनिया आपको पलकों पर रखेगी। तीर्थंकरों की प्रतिमाएं देख लें, पलकें झुकी हुई हैं, इसलिए दुनिया ने उन्हें पलकों पर बिठा लिया है। हम अपने आज को संवार लें तो कल स्वतः संवर जाएगा। वास्तु सुधारने से नहीं, मन को सुधारने से घर अच्छा बनेगा।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमचंद जम्बूकुमार ललित मनोज भैसा परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। आरके आरसी महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग लगातार पहुंच रहे हैं।