भीलवाड़ा में चेक अनादरण के एक मामले में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण) संख्या-05 की पीठासीन अधिकारी नेहा चौहान, आरजेएस (अतिरिक्त कार्यभार) ने सुयोजित इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड एवं उसके निदेशकों को दोषसिद्ध करते हुए 2 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्तों पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये का प्रतिकर भी निर्धारित किया है।

मामला परिवादी ललित प्रसाद कालिया की ओर से सुयोजित इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड एवं उसके निदेशकों के विरुद्ध धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत प्रस्तुत परिवाद से जुड़ा है। मामले की सुनवाई नियमित आपराधिक प्रकरण संख्या 4768/2014 में हुई।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र कचोलिया ने बताया कि मामला एक करोड़ रुपये के चेक से संबंधित था। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार 31 मई 2011 को चेक संख्या 021303 जारी किया गया था। परिवादी ने इस चेक को 30 नवंबर 2011 को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, लेकिन खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया।

चेक के अनादरण के बाद परिवादी की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में चेक राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद मामला न्यायालय के समक्ष पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अभियुक्त पक्ष ने बचाव में कहा कि चेक सुरक्षा के रूप में दिया गया था और परिवादी ने उसका दुरुपयोग किया। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि चेक से संबंधित वैधानिक देयता की धारणा को खंडित करने का भार अभियुक्त पक्ष पर था, लेकिन इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।

न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में माना कि विवादित चेक विधिक ऋण अथवा दायित्व के निर्वहन के लिए जारी किया गया था। अभियुक्त पक्ष इस वैधानिक धारणा का प्रभावी रूप से खंडन करने में सफल नहीं रहा।

अधिवक्ता राजेन्द्र कचोलिया एवं छोटू माली के अनुसार न्यायालय ने सुयोजित इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा संबंधित अभियुक्तों को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के अपराध में दोषसिद्ध करते हुए 2 वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 1 करोड़ 40 लाख रुपये का प्रतिकर निर्धारित किया गया है।

निर्णय में कहा गया है कि अपील/रिवीजन की अवधि समाप्त होने की स्थिति में यह प्रतिकर परिवादी को दिया जाएगा। यदि अभियुक्त प्रतिकर की राशि का भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त 6 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।

न्यायालय ने अभियुक्तों को अपीलीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहने के लिए 10,000 रुपये की जमानत एवं समान राशि का मुचलका प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया। मामले में निर्णय 19 अगस्त 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।

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