पीएम श्री विद्यालय विजयपुरा के छात्रों का सरिस्का टाइगर रिजर्व भ्रमण
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने अरावली की जैव-विविधता, वन्यजीव संरक्षण का महत्व समझा और भरतरी मंदिर के दर्शन किए।
पर्यावरण फील्ड विजिट के तहत सरिस्का टाइगर रिजर्व पहुंचे विजयपुरा स्कूल के छात्र और शिक्षक।
विजयपुरा। पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विजयपुरा के 114 छात्र-छात्राओं ने शनिवार को पर्यावरण फील्ड विजिट के तहत सरिस्का टाइगर रिजर्व का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वन क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, जैव-विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। भ्रमण के अंत में विद्यार्थियों ने अरावली पर्वतमाला में स्थित भरतरी मंदिर के दर्शन भी किए।
भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता और वन्यजीव प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था। अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व पहुंचकर विद्यार्थियों ने वन क्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने यहां की प्राकृतिक वनस्पतियों, विशेषकर ढोक के वनों, जल स्रोतों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के बारे में जानकारी हासिल की।
विद्यार्थियों को बाघ, तेंदुए, सांभर और नीलगाय सहित विभिन्न वन्यजीवों के संरक्षण का महत्व समझाया गया। साथ ही वन क्षेत्र की सुरक्षा, अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वनों और वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को ‘बाघ बचेगा तो जंगल बचेगा और जंगल बचेगा तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा’ का संदेश दिया गया। इसके माध्यम से वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के आपसी संबंध के प्रति जागरूक किया गया।
सरिस्का टाइगर रिजर्व के भ्रमण के बाद विद्यार्थियों ने अरावली पर्वतमाला में स्थित भरतरी मंदिर के दर्शन किए। इसके पश्चात भ्रमण दल विद्यालय के लिए रवाना हुआ।
इस शैक्षणिक भ्रमण दल में प्रधानाचार्य श्रीमती साधना मित्तल, हरित विद्यालय प्रभारी खेम सिंह जाटव, व्याख्याता घमंडी लाल बैरवा, अश्वनी कुमार सहरिया, विजेंद्र सिंह मीणा, मुरारी लाल, देवेंद्र सिंह, हिमांशु अग्रवाल, राजकुमारी शर्मा और मनीष कुमार सहित विद्यालय स्टाफ मौजूद रहा। इस भ्रमण के जरिए विद्यार्थियों को प्राकृतिक वन संपदा, जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण के महत्व को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।