सावन लगते ही भुसावर में शुरू हुआ सेवई बनाने का दौर, रक्षाबंधन की तैयारियों में जुटे लोग
भुसावर में सावन लगते ही रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। घर-घर सेवई बनाई जा रही हैं और कारीगर 15 रुपए किलो में सामग्री से सेवई तैयार कर रहे हैं, जबकि तैयार सेवइयां 60 रुपए किलो मिल रही हैं।
तस्वीर में दिख रही महिला भुसावर में रक्षाबंधन के त्योहारी सीजन के लिए तैयार की जा रही लंबी सेवइयों के पास खड़ी नजर आ रही हैं।
भुसावर में सावन लगते ही रक्षाबंधन की तैयारियों का दौर शुरू हो गया है। भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व को लेकर भुसावर सहित उपखण्ड मुख्यालय के ग्रामीण अंचल में घर-घर सेवई और सेवइयां बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं कस्बे में विभिन्न स्थानों पर कारीगर सेवई और सेवइयां बनाने में जुटे हैं, जिससे उन्हें स्थानीय रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है।
हमारे देश में अनेकानेक त्योहार समय-समय पर श्रद्धा के अनुसार धूमधाम एवं हर्षोल्लासपूर्वक रीति-रिवाज के साथ मनाए जाते हैं। इन्हीं त्योहारों में रक्षाबंधन भी शामिल है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु और दीर्घायु की कामना के साथ अच्छे स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की सुरक्षा का वचन देकर उन्हें उपहार देते हैं।
रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में भुसावर में खिरकारी पुराना बिजली के पास, दीवली सड़क मार्ग स्थित बल्लो की चक्की, मुण्डायारा सड़क मार्ग और इटामड़ा सड़क मार्ग पर कारीगर सेवई और सेवइयां बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं।
सेवई, सेवइयां बनाने वाले कारीगर सन्जू सिंघल, सोनू अग्रवाल, महेन्द्र सोनी, योगेश और बेबी, नरेन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि सेवइयां मैदा और सूजी आदि से बनाई जाती हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी सामग्री लेकर आता है तो सेवइयां 15 रुपए प्रति किलो की दर से बनाई जाती हैं। वहीं तैयार मैदा और सूजी से निर्मित सेवई, सेवइयां लेने पर यह 60 रुपए प्रति किलो की दर से हमेशा तैयार मिलती हैं।
महिला पुष्पा, ममता, लक्ष्मी और चंचल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर घर के दरवाजों पर गेरू और खड़िया से बनाए गए श्रवण सालौना को सेवई, चावल आदि का भोग लगाया जाता है।
वहीं किसी लड़के का नव विवाह हुआ है तो वह अपनी ससुराल शगुन के तौर पर सेवई, चावल, बूरा, घेवर, झूला, पटली आदि सामग्री लेकर जाता है। इस तरह सावन शुरू होते ही भुसावर में घर-घर सेवई और सेवइयां बनाने का दौर रक्षाबंधन से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गया है।