भरतपुर: छोंकरवाड़ा कलां में 17 सितंबर को भरेगा हीरामन बाबा का मेला
लोक देवता कारिश देव के मंदिर प्रांगण में लगने वाले वार्षिक लक्खी मेले में पूजा-अर्चना के साथ खेल प्रतियोगिताएं होंगी।
तस्वीर में छोंकरवाड़ा कलां स्थित मंदिर के गर्भगृह में सजी हीरामन बाबा की प्रतिमा दिख रही है।
भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहरों में शामिल तहसील भुसावर के उपखण्ड मुख्यालय क्षेत्र और आगरा-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित छोंकरवाड़ा कलां में आगामी 17 सितंबर, बृहस्पतिवार को श्री कारिश देव (हीरामन बाबा) मंदिर प्रांगण में पारंपरिक श्रद्धा के साथ भव्य धार्मिक मेला और जात का आयोजन किया जाएगा। मेले की तैयारियों को लेकर समस्त ग्रामवासी छोंकरवाड़ा कलां एवं मेला कमेटी जुट गई है।
छोंकरवाड़ा कलां एवं हीरामन बाबा मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि लोक देवता कारिश देव (हीरामन बाबा) के मेले में दूर-दराज के गांवों और विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचेंगे। श्रद्धालु बाबा के मंदिर में पूजा-अर्चना कर दूध, दही, आटा, घी, चावल और शक्कर आदि का भोग लगाएंगे।
मेले के दौरान दौड़, पेंथा (लंबी कूद) और गोला फेंक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही रंगारंग कार्यक्रम, भजन संध्या और मेले की सजावट भी समस्त ग्रामवासी छोंकरवाड़ा कलां एवं श्री कारिश देव (हीरामन बाबा) मेला कमेटी की ओर से की जाएगी। प्रतियोगिताओं में विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्र में लोक देवता हीरामन बाबा की श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि हीरामन बाबा की कृपा से सांप, बिच्छू और अन्य कीड़े के कष्टों से मुक्ति मिलती है। जात और लगने वाले लक्खी मेले में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं, जहां झाड़ा और रज देकर जहर उतारने की परंपरा भी बताई गई है।
मेले और जात के दौरान पीड़ित लोगों के बंधे हुए बंध कटवाना अनिवार्य होता है। इस तरह 17 सितंबर को होने वाला कारिश देव (हीरामन बाबा) का मेला धार्मिक आस्था, पारंपरिक पूजा-अर्चना और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ छोंकरवाड़ा कलां में आयोजित किया जाएगा।