सर्वधर्म समभाव संगोष्ठी के साथ सम्पन्न हुआ सिद्दीक बाबा जन्मोत्सव व गुरुपूर्णिमा महोत्सव, मानवता का दिया संदेश

बारां में सिद्दीक बाबा जन्मोत्सव एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव के तहत आयोजित दो दिवसीय सांप्रदायिक सद्भावना समारोह का समापन सर्वधर्म समभाव संगोष्ठी के साथ हुआ। कार्यक्रम में मानवता, प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया तथा विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।

Update: 2026-07-28 11:52 GMT

तस्वीर में बारां में आयोजित सिद्दीक बाबा जन्मोत्सव एवं सांप्रदायिक सद्भावना समारोह के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और बच्चे दिखाई दे रहे हैं।

बारां। सिद्दीक बाबा लोक कल्याण संस्थान, बारां एवं साम्प्रदायिक सद्भावना संस्थान, बारां के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय समन्वयी संत एवं "मिशन ऑफ कम्युनल हार्मनी" के प्रणेता सिद्दीक बाबा का जन्मोत्सव एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सांप्रदायिक सद्भावना समारोह का दूसरा एवं अंतिम दिवस श्रद्धा, आध्यात्मिक वातावरण और सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रातः 11 बजे हवन से हुआ। इसके बाद दोपहर 12 बजे पवित्र कुरआन शरीफ का ख्वानी किया गया, जबकि 12:30 बजे गुरु ग्रंथ साहिब एवं पवित्र बाइबिल का पाठ हुआ। इसके उपरांत सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन कराया गया।

सायंकाल आयोजित गुरुपूर्णिमा उत्सव एवं आरती के दौरान सिद्दीक बाबा का संदेश श्रद्धालुओं के समक्ष वाचन किया गया। संदेश में कहा गया कि "समस्त चर-अचर जगत एकमात्र परमात्मा से उत्पन्न हुआ है और उसी एक शक्ति के विभिन्न रूप हैं। कोई उसे ईश्वर कहता है, कोई अल्लाह, कोई गॉड तो कोई निरंकार। 'मानवता' मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है। हमें सम्प्रदायों के स्थान पर मानवता को स्थान देना चाहिए।"

इसके पश्चात आयोजित सर्वधर्म समभाव संगोष्ठी में विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों, संत-महात्माओं तथा प्रबुद्धजनों ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता में एकता और परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है। समाज में प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सद्भाव को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है।

सिद्दीकी बाबा लोक कल्याण संस्थान एवं सांप्रदायिक सद्भावना संस्थान के मुख्य पदाधिकारी जितेंद्र शर्मा पम्मी ने बताया कि समारोह का समापन सायंकाल सामूहिक प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा नगरवासी उपस्थित रहे। आयोजन के सफल संचालन में संस्थान के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा। यह आयोजन सर्वधर्म समभाव, सामाजिक सद्भाव और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बना।

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