विद्या भारती के विद्यालय समाज परिवर्तन के सशक्त केंद्र हैं: नाहरगढ़ चिंतन बैठक में बोले जिलाध्यक्ष राठौर
बारां के नाहरगढ़ स्थित आदर्श विद्या मंदिर में नवीन शैक्षिक सत्र को लेकर सत्रारंभ चिंतन बैठक आयोजित हुई। बैठक में शैक्षिक गुणवत्ता, संस्कारयुक्त शिक्षा, नामांकन वृद्धि अभियान और 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने पर प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा की गई।
तस्वीर में बाएं से दाएं, स्थानीय समिति के संरक्षक राधेश्याम जिंदल, विद्या भारती के जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार राठौर और स्थानीय समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार गर्ग नाहरगढ़ स्थित विद्यालय में बैठक के दौरान मंचासीन नजर आ रहे हैं।
बारां/नाहरगढ़ स्थित विद्या भारती शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर नाहरगढ़ में नवीन शैक्षिक सत्र के सफल संचालन तथा आगामी कार्ययोजना को लेकर जिला टोली के मार्गदर्शन में सत्रारंभ चिंतन बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालय प्रबंध समिति के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों तथा विद्यालय के समस्त आचार्य-दीदी ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विद्यालय के शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं संगठनात्मक विषयों पर व्यापक चिंतन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य नरेश प्रजापति एवं समिति सचिव देवकीनंदन नागर ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, माँ सरस्वती एवं ॐ के चित्र पर पुष्पार्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्या भारती के जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार राठौर, जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा, स्थानीय समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार गर्ग तथा संरक्षक राधेश्याम जिंदल मंचासीन रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार राठौर ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय केवल शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि समाज द्वारा संचालित राष्ट्र निर्माण के संस्कार केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों, शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन, संस्कारयुक्त शिक्षा तथा नामांकन वृद्धि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रमोद कुमार राठौर ने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य ऐसे चरित्रवान, राष्ट्रभक्त एवं समाजहित के लिए समर्पित नागरिकों का निर्माण करना है, जो राष्ट्र को परम वैभव की ओर अग्रसर करें।
बैठक के दौरान नवीन सत्र की कार्ययोजना, शैक्षणिक उत्कृष्टता, छात्र नामांकन, अभिभावक संपर्क, संस्कारमय वातावरण तथा विद्यालय की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र एवं आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।