बारां नगर निकाय चुनाव में टिकट की जंग तेज, भाजपा-कांग्रेस के साथ तीसरे मोर्चे की सक्रियता बढ़ी
बारां नगर निकाय चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के बीच टिकट की जंग तेज है। कमल राठौर का तीसरा मोर्चा सभी 60 वार्डों में सक्रिय है।
बारां नगर निकाय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और तीसरे मोर्चे के बीच 60 वार्डों में नगर बोर्ड बनाने के लिए टिकट दावेदारी और राजनीतिक रस्साकशी जारी है।
बारां में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर टिकट पाने की जंग तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अपने-अपने बोर्ड बनाने के दावे कर रही हैं, वहीं पूर्व सभापति कमल राठौर की अगुवाई में तीसरा मोर्चा भी सभी 60 वार्डों से प्रत्याशी उतारने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में चुनावी मुकाबले में स्पष्ट बहुमत को लेकर अभी संशय बना हुआ है।
कांग्रेस को एक बार फिर अपना बोर्ड बनने का विश्वास है, जबकि भाजपा इस बार नगर की सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। इसी बीच तीसरे मोर्चे की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। पूर्व सभापति कमल राठौर की अगुवाई में तीसरा मोर्चा सभी 60 वार्डों में प्रत्याशी खड़े करने की जुगत में लगा है और सभी वार्डों में जबरदस्त मेहनत किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि तीसरा मोर्चा कितने वार्डों में सफल हो पाएगा, यह अभी सुनिश्चित नहीं है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच टिकट वितरण को लेकर भी तस्वीर अलग-अलग नजर आ रही है। कांग्रेस में एक ही आलाकमान माना जा रहा है, यानी पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया। टिकट के लिए वहां से हरी झंडी मिल जाती है तो आगे कोई व्यवधान नहीं होने की स्थिति बताई जा रही है। इसके ठीक विपरीत भाजपा में अनेक नेता हैं और टिकट वितरण को लेकर आपस में कोई तारतम्य नहीं होने की चर्चा है कि आखिर टिकट वितरण में किसकी चल रही है।
टिकट मांगने वाले दावेदार इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं। कोई किसी नेता से फोन करवा रहा है, कोई जयपुर के चक्कर लगा रहा है तो कोई पार्टी पदाधिकारियों के यहां पहुंच रहा है। कई वार्डों में स्थिति ऐसी है कि एक ही पार्टी के दो-दो और तीन-तीन प्रतिद्वंदी सामने आ रहे हैं। इनके बीच तर्क-वितर्क के साथ जबरदस्त द्वंद्व चल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए नए-नए पार्टी में आए प्रतिस्पर्धी भी सक्रिय हो गए हैं, जबकि धरातल से जुड़े संगठनात्मक कार्यकर्ता इस द्वंद्व से दूरी बनाए हुए हैं। यही स्थिति चुनाव परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कांग्रेस में प्रदेशस्तर और स्थानीय पदाधिकारी तथा शहर अध्यक्ष टिकटों को लेकर मंथन कर रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय आलाकमान ही करेगा। वहीं भाजपा में बाहर से आए हुए पदाधिकारी प्रत्याशियों का आंकलन करने में जुटे हैं। इस पर कई कर्मठ कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी सामने आ रही है। उनका कहना है कि जिन्हें वार्ड की पृष्ठभूमि तक की जानकारी नहीं है, वे टिकटों को फाइनल करेंगे तो वार्ड की वास्तविक स्थिति का आकलन कैसे होगा। कार्यकर्ताओं का सवाल है कि इन बाहर से आए व्यक्तियों को वार्ड की क्या जानकारी है और क्या उन्होंने कभी वार्ड की समस्याओं को रूबरू होकर देखने या उनके निस्तारण में रुचि दिखाई है।
कर्मठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल सत्ता और संगठन के बलबूते पर नगर निकाय चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। इसके लिए कर्मठ, संगठनात्मक और वास्तविक कार्यकर्ताओं को भी साथ जोड़ना होगा। कई वार्डों में भाजपा के उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी परेशानी सामने आ रही है।
इधर, तीसरा मोर्चा सभी 60 वार्डों में अपनी गतिविधियां तेज कर रहा है। इसके अलावा इस बार सवर्ण वोट का भी जोर देखने को मिल सकता है। सवर्ण समाज वर्तमान शासन और सत्ता से यूजीसी के कारण जबरदस्त नाराज है। इस नाराजगी का लाभ किसे मिलेगा, इसका असर चुनाव परिणाम में नजर आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में टिकट वितरण से लेकर वार्ड स्तर की प्रतिस्पर्धा और तीसरे मोर्चे की सक्रियता तक, नगर निकाय चुनाव का मुकाबला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण होता दिखाई दे रहा है।