बारां: देशी मदिरा के 40% न्यूनतम उठाव के नियम का विरोध, आबकारी विभाग को ज्ञापन
50 और 60 यू.पी. देशी मदिरा के न्यूनतम उठाव की अनिवार्यता से ठेकेदारों पर बढ़े वित्तीय संकट को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।
बारां में 50 UP मदिरा के न्यूनतम उठाव के विरोध में शराब ठेकेदार गोदाम बंद कर प्रदर्शन करते हुए।
बारां में देशी मदिरा के न्यूनतम उठाव की अनिवार्यता को लेकर शराब ठेकेदारों ने विरोध जताते हुए आबकारी विभाग से आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। राज लिकर वेलफेयर सोसाइटी (शराब ठेकेदार यूनियन) जिला बारां के नेतृत्व में जिले के समस्त मदिरा अनुज्ञाधारियों ने आबकारी आयुक्त, राजस्थान (उदयपुर) के नाम जिला आबकारी अधिकारी, बारां के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। विरोध के सांकेतिक स्वरूप में सभी गोदाम भी बंद रखे गए।
अनुज्ञाधारियों ने ज्ञापन में 28 सितंबर 2026 को जारी उस आदेश को संशोधित करने या निरस्त करने की मांग की है, जिसके तहत 50 एवं 60 यू.पी. देशी मदिरा का न्यूनतम 40 प्रतिशत उठाव अनिवार्य किया गया है। उनका कहना है कि इस प्रावधान के कारण व्यापार संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
ज्ञापन में बताया गया कि बाजार में उपभोक्ताओं की मांग, बिक्री के तरीके और क्षेत्रवार पसंद अलग-अलग हैं। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मदिरा अनुज्ञाधारी के लिए निर्धारित 40 प्रतिशत न्यूनतम उठाव की सीमा पूरी करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। बाजार की वास्तविक मांग और क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप मदिरा की बिक्री में अंतर होने के कारण इस अनिवार्यता को लेकर ठेकेदारों में चिंता है।
मदिरा अनुज्ञाधारियों के अनुसार बाजार में अन्य प्रकार की देशी मदिरा की मांग अधिक है, जबकि 50 यू.पी. मदिरा की मांग अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में निर्धारित न्यूनतम उठाव की बाध्यता के चलते दुकानदारों पर अनावश्यक स्टॉक का बोझ बढ़ रहा है। इससे उनकी पूंजी अवरुद्ध हो रही है और वित्तीय संकट उत्पन्न होने की पूरी संभावना है।
ठेका संचालकों ने आबकारी विभाग से मांग की है कि बाजार की वास्तविक मांग और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 28 सितंबर 2026 के आदेश में संशोधन किया जाए या इसे निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि इससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार सुचारू रूप से व्यापार का संचालन कर सकेंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान अशोक सुवालंका, केजी चंदेल, बनवारी मीणा, गुडडू बना, रिन्कू बना, इन्द्रपाल रॉय, गज्जू बना, जीतू खींची, मोहित बना, सोनू गोस्वामी, सावन पारेता, रामदयाल मीणा, गजानंद पारेता, राकेश शिवहरे, अंशुल यादव, ओम मारवाडा, अजय शिवहरे और महेश शिवहरे सहित जिले के विभिन्न मदिरा अनुज्ञाधारी मौजूद रहे। अब ठेकेदारों की मांग के केंद्र में 50 एवं 60 यू.पी. देशी मदिरा के न्यूनतम 40 प्रतिशत उठाव की अनिवार्यता पर विभागीय पुनर्विचार है।