देवरी में गुरु पूर्णिमा पर आचार्य-दीदियों का सम्मान, विद्या भारती गुरुकुल परंपरा के पुनर्जागरण में जुटी: प्रमोद राठौर
बारां के देवरी स्थित आदर्श विद्या मंदिर में गुरु पूर्णिमा उत्सव पर आचार्य-दीदियों का सम्मान हुआ। कार्यक्रम में प्रमोद कुमार राठौर ने गुरुकुल परंपरा और संस्कार आधारित शिक्षा पर विचार रखे।
तस्वीर में बारां के आदर्श विद्या मंदिर देवरी में गुरु पूर्णिमा उत्सव के दौरान अतिथि एवं आयोजक शिक्षकों को स्मृति-चिन्ह और सम्मान सामग्री भेंट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
बारां/देवरी में विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर शिशु वाटिका देवरी में गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा, भक्ति और भारतीय संस्कृति की गरिमा के अनुरूप उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा का भावपूर्ण स्मरण करते हुए विद्यालय के समस्त आचार्य-दीदियों का अंगवस्त्र, कलम एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनरेश योगी एवं सचिव अनिल राघव ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विद्या भारती शिक्षा संस्थान बारां के जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार राठौर रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वामी विवेकानंद शिक्षा समिति के सचिव माखन राठौर तथा विद्या भारती बारां के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय विद्यालय समिति के सचिव राजकुमार पारेता ने की।
मुख्य वक्ता प्रमोद कुमार राठौर ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन को ज्ञान, संस्कार, चरित्र एवं राष्ट्रभक्ति से आलोकित करते हैं। उनके अनुसार विद्या भारती भारतीय शिक्षा दर्शन के माध्यम से ऐसी गुरुकुल परंपरा का पुनर्जागरण कर रही है, जहाँ शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रभाव का समन्वय होता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला पथप्रदर्शक होता है।
कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के पश्चात शांति मंत्र के साथ हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह आयोजन भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान के संदेश के साथ संपन्न हुआ।