उत्तर भारत में फिर बदला मौसम का मिजाज, पहाड़ों से मैदानों तक बारिश का दौर जारी; IMD ने दिया अपडेट|
आईएमडी के 28 अगस्त के बुलेटिन के अनुसार उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
पहाड़ों से मैदानों तक बारिश के बीच रास्ते पर छाता लेकर चलते लोग उत्तर भारत में बारिश के मौसम के संदर्भ में।
उत्तर भारत में मानसून का प्रभाव लगातार अपनी स्थिति बदल रहा है, जिससे पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह से अलग नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों में बारिश का यह दौर अभी कुछ और दिनों तक जारी रहने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग की इस रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम में होने वाले ये बदलाव जनजीवन और पर्यावरण दोनों को प्रभावित करेंगे, जिससे स्थानीय नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
मौसम विभाग के 28 अगस्त के बुलेटिन के मुताबिक, विशेष रूप से पर्वतीय और उससे सटे क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों में 28 अगस्त से 30 अगस्त के बीच छिटपुट बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में 29 अगस्त को गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे वायुमंडल में ठंडक और नमी दोनों का अहसास बना रहेगा। इसी तरह, पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी 28 और 29 अगस्त तक लगातार बारिश होने के आसार हैं, जिससे पहाड़ी रास्तों और स्थानीय इलाकों में मौसम सुहाना रहने के साथ-साथ फिसलन या अन्य मौसमी परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं।
केवल पर्वतीय राज्य ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड में भी मौसम का मिजाज काफी लंबे समय तक सक्रिय रहने वाला है। आईएमडी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड राज्य में 28 अगस्त से शुरू हुआ बारिश का यह सिलसिला आगामी 3 सितंबर तक लगातार जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन लगातार हो रही बारिश की वजह से उत्तर भारत के पूरे क्षेत्र में तापमान में गिरावट और नमी की अधिकता बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन इलाकों में बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हो रही बारिश से एक व्यापक मानसूनी पैटर्न स्थापित हो गया है।
उत्तर भारत के इन राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों और पूर्वानुमानों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों को एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि किसी भी संभावित असुविधा से बचा जा सके।