उत्तर भारत में कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ के खतरे से सहमे लोग|

उत्तर भारत में मानसून के अधिक सक्रिय होने से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली समेत कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

Update: 2026-07-27 01:40 GMT

उत्तर भारत में मानसून की सक्रियता के बीच पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश और जनजीवन की स्थिति।

उत्तर भारत में मानसून एक बार फिर अपने अत्यंत सक्रिय और उग्र रूप में आ चुका है, जिसके परिणामस्वरुप समूचे क्षेत्र के मौसम के मिजाज में व्यापक बदलाव दर्ज किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, आज 27 जुलाई से उत्तर भारत के विस्तृत भूभाग पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियां और अधिक तीव्र होने की प्रबल संभावना है। इस मौसमी बदलाव के प्रत्यक्ष प्रभाव से देश के कई प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश होने के स्पष्ट और गंभीर आसार जताए गए हैं, जिससे प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।

मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों जैसे कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित कई अन्य क्षेत्रों में भारी वर्षा का यह दौर देखने को मिलेगा। इन सभी चिन्हित क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही लगातार बनी हुई है और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों के मद्देनजर मैदानी तथा पहाड़ी दोनों ही इलाकों में एहतियाती कदम उठाए जाने शुरू कर दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

पहाड़ी राज्यों में निरंतर हो रही तीव्र वर्षा के कारण स्थानीय जनजीवन पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है। मौसम विभाग ने अपनी आधिकारिक चेतावनी में विशेष रूप से रेखांकित किया है कि इन पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड की घटनाएं घटित होने का भारी खतरा बना हुआ है। भूस्खलन के कारण कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं, जिससे पहाड़ी बस्तियों का संपर्क मुख्य शहरों से कटने की आशंका उत्पन्न हो जाती है।

पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में भी लगातार बरसते पानी के कारण गंभीर स्थितियां बन रही हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के परिणामस्वरुप अचानक बाढ़ आने का खतरा भी तेजी से मंडराने लगा है। मौसम विभाग और संबंधित हाइड्रोलॉजिकल एजेंसियों के अनुसार, निरंतर जलप्रपात के चलते क्षेत्र के विभिन्न नदी-नालों के जलस्तर में तीव्र गति से वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो अपने खतरे के निशान के करीब पहुंच सकते हैं या निचले इलाकों में जलभराव की समस्या को और विकट बना सकते हैं।



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