गिरड: कम पानी वाली तिलहनी फसलों की खेती पर जोर
नागपुर के जवस अनुसंधान संस्थान ने समुद्रपुर तहसील के गिरड में कार्यशाला आयोजित कर किसानों को कम पानी में सरसों और जवस उगाने की सलाह दी।
गिरड में आयोजित बुवाई-पूर्व कार्यशाला के दौरान किसानों को जवस के बीज वितरित किए गए।
महाराष्ट्र के समुद्रपुर तहसील के गिरड में जवस उत्पादक किसानों को रबी सीजन में कम पानी में होने वाली तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई। जवस प्रजनक डॉ. बिना नायर ने कहा कि सूखे की परिस्थितियों में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को सरसों, जवस और करडई जैसी कम पानी में उगने वाली तिलहनी फसलों का चयन करना चाहिए। टिकाऊ और पारंपरिक फसलों की खेती से प्रतिकूल मौसम के दौरान कृषि नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
नागपुर स्थित जवस अनुसंधान संस्थान की ओर से गिरड स्थित मगन संग्रहालय के प्राकृतिक खेती विकास केंद्र में रबी सीजन के जवस उत्पादक किसानों के लिए बुवाई-पूर्व कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डॉ. बिना नायर ने किसानों को जवस की खेती और टिकाऊ फसल पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने से सूखे की स्थिति में खेती से जुड़े जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।
कार्यशाला के दौरान किसानों ने जवस की फसल के उत्पादन में आने वाली समस्याओं, उनके संभावित समाधानों और खेती के अपने अनुभवों पर चर्चा की। इस अवसर पर उपस्थित किसानों को जवस के बीज भी प्रदर्शन के लिए वितरित किए गए।
किसान चक्रधर भगत ने पिछले सीजन में जवस की फसल उगाने के अपने अनुभव साझा किए। वहीं, मगन संग्रहालय की ओर से संचालित तेल स्वराज्य अभियान के विस्तार, वर्तमान स्थिति और इसके उद्देश्यों की जानकारी परियोजना समन्वयक गजानन गारघाटे ने दी।
कार्यशाला के समापन पर जवस अनुसंधान संस्थान के तकनीकी सहायक नंदकिशोर टेकाले ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में कम पानी में उगने वाली तिलहनी फसलों को अपनाने, जवस उत्पादन से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।