वर्धा में फसल बीमा और ग्राम पंचायत चुनाव की मांग, सौंपा ज्ञापन
सूखे के संकट के बीच सरपंच संघटना ने पालकमंत्री पंकज भोयर से मुलाकात कर 100% फसल बीमा राशि और जल्द चुनाव कराने की मांग की।
तस्वीर में समुद्रपुर स्थित निवास पर पालकमंत्री पंकज भोयर को ज्ञापन सौंपते सरपंच संघटना के प्रतिनिधि.
वर्धा जिले में बारिश की लंबी खेंच से फसलें झुलसने और आगामी दिनों में जल संकट की आशंका के बीच सरपंच संघटना ने किसानों को 100 प्रतिशत फसल बीमा राशि देने और ग्राम पंचायत चुनाव तत्काल कराने की मांग उठाई है। सरपंच संघटना के जिलाध्यक्ष प्रा. धर्मेंद्र राऊत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने समुद्रपुर में पालकमंत्री पंकज भोयर के निवास पर मुलाकात कर विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने पालकमंत्री के साथ जिले में उत्पन्न सूखे की स्थिति, किसानों की समस्याओं, ग्राम पंचायतों के प्रशासन और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। संघटना के अनुसार, जिले में करीब एक महीने से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें झुलस गई हैं और किसानों में चिंता का माहौल है। जिले में सामान्य से 30 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण आने वाले समय में कई गांवों में पानी की किल्लत पैदा होने की आशंका है।
संघटना ने कहा कि सरकार ने सूखा घोषित कर दिया है। हालांकि, शासन की ओर से अब तक यह घोषणा नहीं की गई है कि कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी, लेकिन सहायता मिलने की उम्मीद है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, उन्हें बिना किसी शर्त, नियम या मानदंड की बाध्यता के 100 प्रतिशत बीमा राशि का भुगतान किया जाए, ताकि सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत मिल सके।
ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति पर भी प्रतिनिधिमंडल ने गंभीर सवाल उठाए। संघटना ने बताया कि वर्तमान में ग्राम पंचायतों पर सरकारी प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, लेकिन कई प्रशासकों के पास चार-चार गांवों की जिम्मेदारी है और वे संबंधित गांवों के बाहर के निवासी हैं। इनमें केंद्र प्रमुख, पशुधन विभाग के कर्मचारी और आंगनवाड़ी सुपरवाइजर भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इन प्रशासकों को उनके जिम्मे सौंपे गए गांवों की समस्याओं और परिस्थितियों का पर्याप्त अध्ययन नहीं है। ऐसे में गांवों के विकास तथा सूखे के दौरान पैदा होने वाली समस्याओं को ध्यान में रखकर आवश्यक उपाययोजनाएं करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसी स्थिति को देखते हुए सरपंच संघटना ने सरकार से ग्राम पंचायतों के चुनाव तत्काल कराने की मांग की। संघटना ने कहा कि गांवों की स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले सरपंच, उपसरपंच और ग्राम पंचायत सदस्यों की भागीदारी जरूरी है, ताकि ग्रामीण समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके और विकास कार्य प्रभावित न हों।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि यदि तत्काल ग्राम पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं है, तो मौजूदा ग्राम पंचायत निकाय के सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही पहले की तरह सदस्यों की समिति गठित कर खर्च और विकास कार्यों से संबंधित सभी अधिकार दिए जाएं, ताकि ग्राम पंचायतों का कामकाज सुचारु रूप से चल सके।
ज्ञापन में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के आदेश का मुद्दा भी उठाया गया। संघटना के अनुसार, सरपंच को प्रशासक नियुक्त करने के संबंध में उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 16 सितंबर को दोपहर 12 बजे यथास्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद वर्धा जिला परिषद की ओर से उसी दिन दोपहर में जिले की साढ़े तीन सौ से अधिक ग्राम पंचायतों पर सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति के पत्र जारी किए गए। संघटना ने इस कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग की।
इसके अलावा, वर्धा जिले में 500 से अधिक ग्राम पंचायतें होने का हवाला देते हुए सरपंच संघटना ने जिले में सरपंच भवन का निर्माण कराने की मांग भी रखी। प्रतिनिधिमंडल ने पालकमंत्री पंकज भोयर के समक्ष इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर ज्ञापन सौंपा। पालकमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर सरपंच संघटना के जिलाध्यक्ष प्रा. धर्मेंद्र राऊत, जिला प्रसिद्धि प्रमुख विलास नवघरे, जिला उपाध्यक्ष मुरलीधर चौधरी, जिला उपाध्यक्ष राजेश सावरकर, वर्धा तालुका अध्यक्ष कीर्ति सवाई, बालुभाऊ बोके, उत्तमराव घुमडे और सुनिताई ढवडे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। जिला प्रसिद्धि प्रमुख विलास नवघरे का नाम उपस्थित पदाधिकारियों में दो बार उल्लेखित है।