कुल शरीफ से पहले अदनान रज़ा क़ादरी का पैग़ाम: दीनी तालीम अपनाएं, नशे और फ़िज़ूलखर्ची से बचें
बरेली में 108वें उर्स-ए-रज़वी के तीसरे और आखिरी दिन कुल शरीफ़ से पहले मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने दीनी तालीम, इश्क़-ए-रसूल और आला हज़रत की तालीमात पर अमल का पैग़ाम दिया। उन्होंने नौजवानों से नशे, फ़िज़ूलखर्ची से दूर रहने और ईमान, सेहत व मेहनत की कमाई की हिफ़ाज़त की अपील की। कई स्थानों पर लंगर-ए-आम भी जारी रहा।
108वें उर्स-ए-रज़वी के अंतिम दिन बरेली में आयोजित कुल शरीफ़ से पहले मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए ज़ायरीन को दीनी तालीम और नशे से दूर रहने का पैग़ाम दिया।
बरेली। 108वें उर्स-ए-रज़वी के तीसरे और आखिरी दिन आला हज़रत के कुल शरीफ़ से पहले नबीरा-ए-आला हज़रत एवं ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने क़ौम को दीनी तालीम, इश्क़-ए-रसूल और आला हज़रत की तालीमात पर अमल करने का पैग़ाम दिया। उन्होंने नौजवानों से हर तरह के नशे से दूर रहने, सेहत का ख्याल रखने और फ़िज़ूलखर्ची से बचने की अपील की।
ख़्वाजा कुतुब स्थित आरएसी मुख्यालय बैतुर्रज़ा से मरकज़ी मस्जिद बीबी जी तक का इलाका रोशनी और सजावट से जगमगाता रहा। सुबह करीब 11 बजे नूरानी महफ़िल का आग़ाज़ हुआ। मौलाना अफ़रोज़ रज़ा क़ादरी की सरपरस्ती और मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी की सदारत में आयोजित महफ़िल की शुरुआत मौलाना नक़ी अंजुम ने तिलावत-ए-कलाम पाक से की। इसके बाद नातो-मनक़बत और तक़रीरों का सिलसिला चला।
कुल शरीफ़ से पहले मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कहा कि अगर मुसलमान चाहते हैं कि उनके इंतकाल के बाद उनकी औलाद उनकी कब्रों पर फ़ातिहा और दुरूद-ओ-सलाम पढ़ने पहुंचे, तो घरों में दीनी माहौल कायम करना होगा। उन्होंने आला हज़रत की तालीमात को आम करने और उन पर अमल करने की भी ताकीद की। उन्होंने कहा कि नौजवान ईमान, सेहत और मेहनत की कमाई की हिफ़ाज़त करें और शरीअत की रोशनी में जिंदगी गुजारें।
महफ़िल में मुफ़्ती उमर रज़ा और मौलाना सलीम रज़ा ने भी तक़रीर की। हाफ़िज़ इमरान रज़ा बरकाती ने निज़ामत की। आखिर में आला हज़रत का लिखा सलाम “मुस्तफ़ा जान-ए-रहमत” पढ़ा गया और मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने ख़ुसूसी दुआ कराई।
कई स्थानों पर दिनभर चला लंगर
कुल शरीफ़ के बाद बैतुर्रज़ा, बिहारीपुर करौलान, ख़लील स्कूल, कुल्हाड़ापीर और जंक्शन स्थित माल गोदाम रोड समेत कई स्थानों पर लंगर-ए-आम दिनभर जारी रहा। बैतुर्रज़ा पर शिकंजी और बुरहान रज़ा क़ादरी की ओर से आइसक्रीम का लंगर भी कराया गया।
उर्स में आए ज़ायरीन ने दरगाह आला हज़रत पर हाज़िरी देने के बाद मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी से दुआएं लीं और अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए। आरएसी वॉलन्टीयर्स ने उर्स के तीनों दिन चादरों के जुलूसों को दरगाह तक पहुंचाने, ट्रैफिक व्यवस्था में पुलिस का सहयोग करने और ज़ायरीन को बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। जबलपुर से सरफ़राज़ आलम ख़ां के नेतृत्व में आई टीम ने भी हज़रत अदनान मियां से मुलाक़ात कर दुआएं लीं। इस तरह 108वें उर्स-ए-रज़वी के अंतिम दिन कुल शरीफ़, दीनी पैग़ाम, नूरानी महफ़िल, लंगर-ए-आम और ज़ायरीन की रवानगी के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।