हापुड़ की सिंभावली शुगर मिल पर कार्रवाई, 109 करोड़ बकाया के बीच 184 गन्ना केंद्र काटे
हापुड़ की सिंभावली शुगर मिल पर गन्ना भुगतान में देरी के चलते बड़ी कार्रवाई हुई है। किसानों के करीब 109 करोड़ रुपये बकाया होने के बीच 184 गन्ना क्रय केंद्र काटे गए हैं। अब गन्ने की आपूर्ति दूसरी मिलों को होगी।
हापुड़ स्थित सिंभावली शुगर मिल का मुख्य प्रवेश द्वार, जिस पर गन्ना किसानों का 109 करोड़ रुपये बकाया होने के कारण प्रशासन और गन्ना विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।
हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। गन्ना भुगतान में देरी को लेकर सिंभावली शुगर मिल पर प्रशासन और गन्ना विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। किसानों का करीब 109 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया होने के चलते मिल के 184 गन्ना क्रय केंद्रों को काट दिया गया है। इस फैसले के बाद इन केंद्रों से जुड़े किसानों के गन्ने की आपूर्ति अब मेरठ, बुलंदशहर और गाजियाबाद की चीनी मिलों को की जाएगी।
गन्ना भुगतान में लगातार देरी के कारण यह कदम उठाया गया है। विभाग के अनुसार, सिंभावली शुगर मिल पर क्षेत्र के किसानों का करीब 109 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। मिल प्रबंधन को बार-बार चेतावनी देने और नोटिस जारी करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए मिल के 184 गन्ना क्रय केंद्रों को हटाने का निर्णय लिया गया।
इस फैसले से सिंभावली शुगर मिल का गन्ना आपूर्ति क्षेत्र दूसरी मिलों को सौंप दिया गया है। गन्ना आयुक्त के आदेशानुसार, जिन किसानों के क्रय केंद्र बदले गए हैं, उन्हें अब गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर की चीनी मिलों में गन्ने की आपूर्ति करनी होगी। गन्ना विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से चालू पेराई सत्र में किसानों को गन्ने की पर्चियां और भुगतान समय पर मिल सकेगा तथा उन्हें भविष्य में आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, क्रय केंद्रों में बदलाव से किसानों के सामने परिवहन और आपूर्ति से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। दूसरे जनपदों की मिलों तक गन्ना पहुंचाने के लिए उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे गन्ने की ढुलाई और ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया बढ़ने की आशंका है, जिससे किसानों की लागत में इजाफा होगा।
इसके अलावा, दूसरे जिलों की मिलों में गन्ने की आपूर्ति के लिए नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना भी किसानों के लिए चुनौती बन सकता है। उन्हें वहां नो-एंट्री और जाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में क्रय केंद्रों के स्थानांतरण के बाद किसानों के लिए गन्ने की आपूर्ति सुचारु बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
गन्ना विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। विभागीय स्तर पर किसानों की समस्याओं और उनके समाधान पर भी निगरानी रखी जा रही है। अब इस कार्रवाई के बाद किसानों को गन्ने की पर्चियां और बकाया भुगतान समय पर मिल पाता है या नहीं, यह आने वाले पेराई सत्र में महत्वपूर्ण रहेगा।