तस्वीर में संयुक्त अधिवक्ता महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र नजर आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2 सितंबर 2026 को आउटसोर्सिंग कर्मचारी सेवा निगम का विधिवत शुभारंभ किए जाने का संयुक्त अधिवक्ता महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश शरण मिश्र ने स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने सरकार की रोजगार नीति को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि आउटसोर्स व्यवस्था में सुधार के बावजूद प्रदेश के युवाओं के भविष्य की स्थिरता कब सुनिश्चित होगी।

सोनभद्र/मिर्ज़ापुर में राकेश शरण मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की पहल स्वागत योग्य है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार का विकल्प बन सकती है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सरकार बड़े निवेश, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे की बात कर रही है। ऐसे में प्रदेश के युवाओं के रोजगार का मॉडल भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें स्थायी नौकरी मिलेगी या वर्षों तक आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करना होगा।

राकेश शरण मिश्र ने कहा कि सरकारी विभागों में अनेक कर्मचारी वर्षों से लगातार वही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। जब काम स्थायी है, आवश्यकता स्थायी है और जिम्मेदारी भी स्थायी है, तो रोजगार अस्थायी क्यों रखा जाए?

उन्होंने सरकार से मांग की कि आउटसोर्स व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ नियमित भर्तियों में तेजी लाई जाए, रिक्त सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए और वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के भविष्य के लिए स्पष्ट एवं न्यायपूर्ण नीति बनाई जाए।

उन्होंने आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन, सेवा शुल्क, भुगतान व्यवस्था और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक वेतन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग की। मिश्र ने स्पष्ट किया कि वे आउटसोर्स कर्मचारियों के विरोध में नहीं हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं जिसमें प्रदेश का युवा अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों को नौकरी की असुरक्षा के बीच गुजारने के लिए मजबूर हो जाता है।

मनरेगा संविदा कर्मचारियों के मुद्दे पर भी उन्होंने स्पष्ट नीति की मांग की। मिश्र ने कहा कि ग्रामीण विकास व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले अनेक कर्मचारी 20-20 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए सरकार को स्थायीकरण अथवा कम से कम मजबूत नौकरी सुरक्षा की स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं को नजर-अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए न्यायपूर्ण और मानवीय नीति बनानी चाहिए।

राकेश शरण मिश्र ने सरकार से नई व्यवस्था की खूबियां बताने के साथ-साथ उसके परिणामों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिला, कितने रिक्त सरकारी पद भरे गए, आउटसोर्स एजेंसियों को कितना भुगतान किया गया और कर्मचारियों तक वास्तविक रूप से कितना वेतन पहुंचा।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्षों से कार्यरत संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य के लिए सरकार की स्पष्ट नीति क्या है।

मिश्र ने कहा कि विकास का अर्थ केवल एक्सप्रेसवे, निवेश और बड़े आर्थिक आंकड़े नहीं हैं। विकास तब सार्थक होगा, जब प्रदेश का युवा अपने भविष्य को सुरक्षित महसूस करेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि आउटसोर्स व्यवस्था को स्थायी रोजगार का विकल्प न बनाया जाए, नियमित भर्तियां तेज की जाएं, रिक्त पद भरे जाएं, वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य के लिए न्यायपूर्ण नीति बनाई जाए और पूरी व्यवस्था की जवाबदेही सार्वजनिक की जाए।

उन्होंने कहा, “ठेके पर काम चल सकता है, लेकिन प्रदेश के युवाओं का भविष्य ठेके पर छोड़ना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है।”