तस्वीर में एक व्यक्ति इमारत के पिलर पर सरकारी कागज का नोटिस चिपका रहा है।

हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर (उत्तर प्रदेश)। हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के शाहपुर चौधरी गांव स्थित हाई-प्रोफाइल अवैध प्लॉटिंग प्रोजेक्ट ‘गंगा काउंटी’ पर वन विभाग ने कार्रवाई की है। विभाग ने कॉलोनी के मुख्य गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया है। कार्रवाई के बाद यहां प्लॉट खरीदने वाले सैकड़ों निवेशकों और आम नागरिकों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी यहां लगा दी थी।

वन विभाग का दावा है कि ‘गंगा काउंटी’ की पूरी प्लॉटिंग हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य के इको-सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आती है। विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण या कमर्शियल एक्टिविटी प्रतिबंधित है। विभाग ने यह भी कहा है कि प्रोजेक्ट के विकास के लिए वन विभाग या संबंधित पर्यावरण मंत्रालयों से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या अनुमति नहीं ली गई थी।

बताया जा रहा है कि मामला हापुड़ की ‘डॉ. अब्दुल कलाम एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी’ के चेयरमैन आबिद हुसैन की मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भू-माफिया और बड़े प्रॉपर्टी कारोबारी पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन कर प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं। शिकायत का संज्ञान लेते हुए वन विभाग की टीम ने जांच की और गुरुवार को भारी अमले के साथ मौके पर पहुंचकर प्रोजेक्ट के मुख्य एंट्रेंस गेट पर सरकारी नोटिस चस्पा कर दिया।

गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के वन अनुभाग अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘गंगा काउंटी’ नाम की इस प्लॉटिंग को लेकर विभाग की ओर से सख्त नोटिस जारी किया गया है। उनके अनुसार, पूरी जमीन नियमानुसार हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य के इको-सेंसिटिव जोन (Protected Eco-Sensitive Zone) के दायरे में आती है। इसके विकास के लिए वन विभाग या संबंधित पर्यावरण मंत्रालयों से कोई NOC या अनुमति नहीं ली गई। मामले में अब आगे सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने नोटिस की प्रतियां उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO), गढ़मुक्तेश्वर को भी अग्रिम प्रशासनिक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं। वन विभाग की इस कार्रवाई से अब प्रोजेक्ट से जुड़े निर्माण और प्लॉटिंग गतिविधियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

‘गंगा काउंटी’ गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र की चर्चित और लक्जरी कॉलोनियों में से एक बताई जा रही थी। बिल्डरों की ओर से इसे दिखाकर लोगों को बड़े-बड़े सपने बेचे गए थे। अब वन विभाग की कार्रवाई के बाद यहां प्लॉट खरीदने वाले आम लोगों में आक्रोश और डर का माहौल है।

जानकारों के अनुसार, यहां करोड़ों रुपये की जमीनों का हेरफेर और बुकिंग हो चुकी है, जिससे करोड़ों का निवेश फंसने की आशंका है। बिना जरूरी कागजात और वन विभाग की मंजूरी के जमीनें बेचने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ लोग कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

चूंकि यह इलाका संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र है, इसलिए आने वाले दिनों में प्रशासन यहां किए गए निर्माण कार्यों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त भी कर सकता है। ऐसे में ‘गंगा काउंटी’ में निवेश करने वाले लोगों के सामने अपनी रकम और संपत्ति को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

यदि आप भी गढ़मुक्तेश्वर या गंगा नदी के कछार वाले इलाकों में कोई प्रॉपर्टी या प्लॉट खरीद रहे हैं, तो सबसे पहले HDA (हापुड़ पिलखुआ विकास प्राधिकरण) और वन विभाग से उसकी वैधता की पुष्टि करना जरूरी है। बिना जांचे-परखे भू-माफियाओं के बहकावे में किया गया निवेश बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।

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