कासगंज में बूढ़ी गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आठ नालों के दूषित जल का बायोरेमीडिएशन पद्धति से शोधन कराया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही वृक्षारोपण की लंबित जिओ-टैगिंग शीघ्र पूरी करने और जल गुणवत्ता में सुधार से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

27 अक्टूबर 2026 को कलेक्ट्रेट स्थित रुद्राक्ष सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण समिति, जिला गंगा समिति एवं जिला वृक्षारोपण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, गंगा नदी के पुनरोद्धार, वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता तथा विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के वृक्षारोपण महायज्ञ के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा कराए गए वृक्षारोपण कार्यों की जिओ-टैगिंग की प्रगति से अवगत कराया। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन विभागों की जिओ-टैगिंग लंबित है, वे प्राथमिकता के आधार पर इसे शीघ्र पूरा करें, ताकि वृक्षारोपण कार्यों का समुचित अभिलेखीकरण और सत्यापन सुनिश्चित हो सके।

जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने नदियों एवं नालों की स्थिति, जल गुणवत्ता और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की सैंपलिंग रिपोर्ट की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बूढ़ी गंगा नदी में गिरने वाले नालों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। नगर निकाय गंजडुंडवारा के चार, सोरों के तीन और भरगेन के एक नाले सहित कुल आठ नालों के दूषित जल का बायोरेमीडिएशन पद्धति से शोधन कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि गंगा नदी और अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। पर्यावरण संरक्षण और जल गुणवत्ता में सुधार से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि इनसे जुड़े प्रयास प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकें।

बैठक में आगामी 04 नवंबर 2026 को गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में जिला गंगा समिति के तत्वावधान में सोरों जी स्थित हरि की पौड़ी घाट पर भव्य गंगा आरती आयोजित करने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया की ओर से लहरा घाट पर कछुआ विमोचन कार्यक्रम आयोजित किए जाने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया।

गंगा नदी के किनारे निर्माण कार्यों से संबंधित नदी पुनरोद्धार, संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण आदेश, 2016 के पैरा 6 एवं 42 के प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव जिला गंगा समिति के माध्यम से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को प्रेषित किया जाएगा।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में वृक्षारोपण कार्यों की लंबित जिओ-टैगिंग पूरी करने, बूढ़ी गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए आठ नालों के दूषित जल का शोधन कराने तथा सोरों जी में गंगा आरती के आयोजन की तैयारियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

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