एटा कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली अधिकारियों संग बैठक करती दिख रही हैं।

एटा में मतदान स्थलों के पुनर्गठन और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया को लेकर जिला निर्वाचन प्रशासन ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश साझा किए। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी एम. अरुन्मोली की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान स्थलों के संभाजन, मतदान स्थलों के परिवर्तन एवं समायोजन और संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान-2026 पर चर्चा की गई।

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक मतदान स्थल पर अधिकतम 1200 मतदाताओं की निर्धारित सीमा को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद आवश्यकता के अनुसार नए मतदान स्थल बनाए जाएंगे। मतदान स्थलों के संभाजन की प्रक्रिया को दावे-आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम रूप देकर निर्वाचन आयोग को प्रेषित किया जा रहा है।

एम. अरुन्मोली ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से इस प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदान स्थलों के परिवर्तन, समायोजन एवं पुनर्गठन की प्रक्रिया इस तरह पूरी की जाए, जिससे मतदाताओं को अपने निर्धारित मतदान स्थल तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और मतदान प्रक्रिया सुगम बनी रहे।

जिलाधिकारी ने मतदाता सूची को शुद्ध एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को नियमानुसार हटाने में राजनीतिक दलों की सक्रिय भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से उन युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की अपील की, जो 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने पात्र युवाओं के फार्म-6 भरवाकर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने पर जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक युवा लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अजय नारायण सिंह, संबंधित चारों विधानसभाओं के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में मतदान स्थलों के पुनर्गठन और मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान-2026 को लेकर राजनीतिक दलों के सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

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