ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी, तहसील तिर्वा, जनपद कन्नौज को संबोधित एक प्रार्थना पत्र में तहसील तिर्वा के लेखपालों की ओर से तहसीलदार तिर्वा श्री अवनीश कुमार के अधीन कार्य न करने के निर्णय की जानकारी देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रार्थना पत्र में विभिन्न राजस्व प्रकरणों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि निष्पक्ष रूप से कार्य करने वाले लेखपालों पर दबाव बनाया गया, उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई तथा राजस्व मामलों में पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप किया गया।

प्रार्थना पत्र के अनुसार तहसील तिर्वा के राजस्व ग्राम शाहनगर में लेखपाल श्री शिवरतन सिंह ने गाटा संख्या 870 मि. में पट्टे से प्राप्त भूमि के खातेदार मुकेश बाबू आदि को दिनांक 28.06.2025 को भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा दिलाया था। बताया गया कि मुकेश बाबू द्वारा आईजीआरएस तथा थाना दिवस में प्रार्थना पत्र दिए गए थे, जिनमें आईजीआरएस संख्या 92516000012960 का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पैमाइश के दौरान राकेश यादव, जो गाटा संख्या 870 मि. के खातेदार नहीं थे और कथित रूप से अवैध एवं अनाधिकृत रूप से भूमि पर कब्जा किए हुए थे, उन्हें हटाकर पट्टाधारक मुकेश बाबू को कब्जा दिलाया गया।

प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि लेखपाल श्री शिवरतन सिंह ने शासनादेश संख्या 402/1-2-2017-1 (सामान्य)/2017 दिनांक 01 मई 2017 के अनुरूप विधि एवं व्यवस्था तथा शासन की मंशा के अनुसार कार्रवाई की थी। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि राकेश यादव पुत्र बच्चन लाल की पत्नी कमला देवी गाटा संख्या 1075 मि. की संक्रमणीय भूमिधर खातेदार हैं, जो उन्होंने लगभग तीन वर्ष पूर्व बैनामे के माध्यम से प्राप्त की थी।

आरोप लगाया गया है कि राकेश यादव के गाटा के सीमांकन तथा लेखपाल श्री शिवरतन सिंह द्वारा पट्टाधारक को दिलाए गए कब्जे की जांच के लिए तहसीलदार तिर्वा द्वारा लगभग एक वर्ष बाद 22.05.2026 एवं 03.06.2026 को राजस्व टीमें गठित की गईं। प्रार्थना पत्र के अनुसार इन टीमों ने लेखपाल द्वारा कराए गए कब्जे के संबंध में कोई प्रतिकूल रिपोर्ट नहीं दी तथा मुकेश बाबू का कब्जा सही गाटा में पाए जाने के कारण राकेश यादव को कब्जा नहीं दिलाया गया।

आरोप है कि इसके बाद तहसीलदार तिर्वा ने 29.06.2026 को लेखपाल श्री शिवरतन सिंह का उक्त क्षेत्र से स्थानांतरण कर दिया तथा 02.07.2028 को रविवार शाम 06:00 बजे गाटा संख्या 1075 मि. की खातेदार कमला देवी पत्नी राकेश को गाटा संख्या 870 मि. में पट्टेदार की भूमि पर अविधिक रूप से कब्जा दिला दिया। प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि प्राप्त जानकारी के अनुसार राकेश यादव, तहसीलदार तिर्वा के रिश्तेदार बताए जाते हैं, जिसके चलते उन्होंने लेखपाल श्री शिवरतन सिंह से रंजिश रखते हुए राकेश यादव को प्रेरित कर सिविल न्यायालय में बीएनएस की धारा 173(4) (आईपीसी की धारा 156(3)) के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वाद दाखिल कराया।

लेखपालों ने आरोप लगाया है कि इसके बाद तहसीलदार तिर्वा ने लेखपाल श्री शिवरतन सिंह को अभियुक्त बनाए जाने के उद्देश्य से भ्रामक आख्या प्रस्तुत की। प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि उनकी रिपोर्ट के दूसरे पृष्ठ की प्रथम एवं द्वितीय पंक्ति में कमला देवी को उसकी भूमि से बेदखल कर अन्य को कब्जा दिलाने की बात लिखी गई है, जबकि लेखपालों के अनुसार कमला देवी गाटा संख्या 870 में अनाधिकृत एवं अवैध कब्जाधारक थीं। साथ ही रिपोर्ट के दूसरे पृष्ठ की आठवीं, नौवीं एवं दसवीं पंक्ति में यह उल्लेख किया गया कि कब्जा पैमाइश में लेखपाल द्वारा धन लोलुपता से इंकार नहीं किया जा सकता तथा विभागीय कार्रवाई जैसी विधिक प्रक्रिया अपनाई जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। प्रार्थना पत्र में इसे असत्य और रंजिशपूर्ण आख्या बताते हुए आरोप लगाया गया है कि एक लेखपाल को मुकदमे में फंसाने का षड्यंत्र रचा गया तथा शासन की मंशा के अनुरूप पट्टाधारक को दिलाई गई भूमि के आंशिक हिस्से पर अविधिक रूप से रिश्तेदारों को कब्जा दिलाया गया।

प्रार्थना पत्र में लेखपाल श्री आयुष सिंह का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि वह लगभग पिछले एक वर्ष से लेखपाल क्षेत्र उमर्दा एवं मवई विलवारी में तैनात थे और अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रहे थे। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राजस्व ग्राम मवई विलवारी की गाटा संख्या 1463 मि., रकबा 0.2430 हेक्टेयर में काबिज पट्टाधारक रामदास सविता आदि को हटाकर अपने रिश्तेदार शिवप्रकाश यादव को जबरन कब्जा दिलाने के लिए उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि कानूनगो, क्षेत्रीय लेखपाल एवं अन्य तहसील स्तरीय अधिकारी मौके पर गए, लेकिन कब्जा सही पाए जाने के कारण उसे नहीं हटाया गया।

आरोप है कि जब पट्टाधारक को कब्जा दिलाया गया था, उस समय शिवप्रकाश यादव अपने हिस्से से अधिक भूमि पर अनाधिकृत रूप से काबिज थे और उसी अविधिक रकबे पर पट्टाधारक को कब्जा दिलाया गया था। बाद में शिवप्रकाश यादव ने उसी गाटा के अन्य पट्टाधारक से भूमि क्रय कर ली, जबकि विक्रेता का उस भूमि पर कब्जा नहीं था। इसके बाद पट्टाधारक को हटाकर शिवप्रकाश यादव को कब्जा दिलाने की मांग की जाने लगी।

प्रार्थना पत्र के अनुसार लेखपाल श्री आयुष सिंह के दूसरे क्षेत्र उमर्दा के मजरा खरगपुर में भी तहसीलदार तिर्वा अपने एक रिश्तेदार को काबिज पट्टाधारक को हटाकर कब्जा दिलाने के लिए दबाव बना रहे थे। आरोप लगाया गया है कि दोनों कार्य अविधिक होने के कारण लेखपाल श्री आयुष सिंह ने उन्हें नहीं किया, जिसके बाद 29.06.2026 को उन्हें दोनों क्षेत्रों से हटाकर अन्य क्षेत्र में तैनात कर दिया गया।

लेखपालों ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि जब राजस्व कर्मचारी निष्पक्षता से अपना दायित्व निभा रहे हों, तब उन पर इस प्रकार का दबाव बनाना प्रशासनिक मर्यादा के प्रतिकूल है। यदि किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत हित साधने के लिए इस प्रकार का उत्पीड़न किया जाए तो भय का वातावरण बनता है, जिससे कर्मचारियों की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है तथा राजस्व कार्यों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कर यह देखा जाए कि किन परिस्थितियों में लेखपाल श्री आयुष सिंह को हटाया गया और उन पर दबाव बनाया गया।

प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि तहसीलदार तिर्वा संक्रमणीय भूमिधर आराजी पर कब्जा दिलाने के लिए बार-बार अलग-अलग टीमों का गठन विशेष रूप से रिश्तेदारों अथवा निजी एवं आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर करते हैं। लेखपालों ने उपजिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पिछले एक वर्ष में गठित 100 से अधिक टीमों के उद्देश्यों और उनके निर्णयों की अपने स्तर से जांच कराई जाए।

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि तहसीलदार तिर्वा के आसपास उनके अनेक रिश्तेदार निवास करते हैं और आरोप है कि वे अक्सर गलत अथवा पक्षपातपूर्ण कार्य कराने का दबाव बनाते हैं। लेखपालों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में पारिवारिक या सामाजिक संबंधों के आधार पर राजस्व कर्मचारियों पर प्रभाव डाला जाएगा तो सरकारी कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित होगी। उनका कहना है कि लेखपालों का दायित्व कानून और राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्य करना है, न कि किसी निजी संबंध अथवा दबाव के आधार पर। ऐसे हस्तक्षेप से कर्मचारियों के मन में असहजता उत्पन्न होती है और वे स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पाते।

प्रार्थना पत्र के अंत में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि तहसीलदार तिर्वा के कथित रूप से सैकड़ों रिश्तेदार तहसील क्षेत्र में निवास करने के कारण संबंधित लेखपालों तथा अन्य लेखपालों के विरुद्ध साजिश, षड्यंत्र अथवा हमले जैसी घटनाएं हो सकती हैं। लेखपालों ने यह भी कहा है कि चूंकि तहसीलदार उनके सक्षम अधिकारी हैं, इसलिए विरोध के कारण उनके विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की आशंका बनी हुई है। इस संबंध में तहसील परिसर (ऑफिस/आवास) का भी उल्लेख करते हुए प्रकरण में हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

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