हापुड़ में एनिमल फैट फर्म पर SIB का छापा, कागजी कारोबार से 4 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा
हापुड़ में एनिमल फैट कारोबार करने वाली फर्म पर SIB की छापेमारी, फर्जी बिलों के जरिए 4 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा।
एक कमरे के अंदर बैठकर दस्तावेजों की जांच करते हुए वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी दिखाई दे रहे हैं।
हापुड़ में वाणिज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने टैक्स चोरी के बड़े मामले का खुलासा करते हुए एनिमल फैट का कारोबार करने वाली एक फर्म पर छापेमारी की है। 29 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई में करीब 400.00 लाख (चार करोड़) रुपये की टैक्स चोरी सामने आई है। गाजियाबाद जोन प्रथम के अपर आयुक्त ग्रेड-2 (SIB) श्री राम केश्वर के निर्देशन में हुई इस जांच के बाद हापुड़ और आसपास के व्यापारिक क्षेत्र में हलचल मच गई है।
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि पशु मीट, टेलो (एनिमल फैट) और हड्डी का चूरा जैसी वस्तुओं का कारोबार करने वाली फर्म 'मोहम्मद खालिद एंड संस' बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी के एक रिहायशी परिसर से संचालित हो रही थी। फर्म का कार्यालय किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के बजाय एक घर में चलाया जा रहा था। अधिकारियों ने मौके पर भौतिक सत्यापन किया तो वहां किसी भी तरह का माल का स्टॉक नहीं मिला। परिसर से केवल खरीद और बिक्री से संबंधित कुछ दस्तावेज बरामद हुए।
मौके पर मौजूद फर्म स्वामी मोहम्मद अमजद ने पूछताछ के दौरान बताया कि उनकी फर्म तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बंगाल, बिहार और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से माल खरीदती है और 'बिल टू शिप टू' माध्यम से उसकी बिक्री करती है। हालांकि, SIB टीम ने जब उपलब्ध दस्तावेजों और बिलों का विस्तृत मिलान किया तो कारोबार में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
अधिकारियों ने ई-वे बिल पोर्टल पर दर्ज वाहनों के मूवमेंट की तकनीकी जांच की। इस दौरान बिलों में दर्शाए गए वाहनों की आवाजाही का रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में सामने आया कि 'एनिमल फैट टेलो' की जिन खेपों की डिलीवरी कागजों में हापुड़ दिखाई गई थी, वे वास्तव में वहां पहुंची ही नहीं थीं। फर्म द्वारा केवल खरीद और बिक्री के फर्जी बिल जारी कर कागजों पर कारोबार संचालित किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेजों के आधार पर फर्म द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लिया जा रहा था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्म ने 15.06 करोड़ रुपये की खरीद के मुकाबले केवल 8.78 करोड़ रुपये की बिक्री घोषित की। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 572.00 लाख रुपये की खरीद के सापेक्ष महज 114.00 लाख रुपये की बिक्री दिखाई गई।
खरीद और घोषित बिक्री के बीच बचे अंतर के संबंध में व्यापारी अधिकारियों को कोई संतोषजनक विवरण या वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में कर-मुक्त बिक्री दर्शाकर भी टैक्स चोरी किए जाने की बात जांच में सामने आई। विभाग ने इस पूरे मामले में करीब 400.00 लाख (चार करोड़) रुपये के कर अपवंचन का खुलासा किया है।
इस कार्रवाई में संयुक्त आयुक्त (SIB), राज्य कर रेंज-बी, गाजियाबाद अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, राज्य कर अधिकारी सतीश कुमार तिवारी और हरिशंकर शिवहरे मुख्य रूप से शामिल रहे। फिलहाल विभाग की ओर से फर्म के अन्य वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। आगे की जांच में इस मामले से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन और अनियमितताओं का भी खुलासा होने की संभावना है।