हापुड़ में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना
हापुड़ में नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने हर्ष को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की पैरवी और मामले की पूरी कानूनी कार्रवाई भी जानिए।
हापुड़ में पॉक्सो एक्ट के मामले में न्यायालय द्वारा आरोपी को सजा सुनाई गई।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। हापुड़ पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत यह सजा दिलाई गई।
उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक द्वारा अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 05 नवंबर 2026 को एडीजे स्पेशल/पॉक्सो एक्ट प्रथम हापुड़ की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अभियुक्त हर्ष को दोषी करार दिया और उसे 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने उस पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
यह मामला 05 मई 2022 का है। अभियुक्त हर्ष पुत्र कुंवरपाल, निवासी ग्राम सोटावाली, थाना हापुड़ देहात, जनपद हापुड़ पर एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप था। इस संबंध में थाना बाबूगढ़ में मु०अ०सं० 158/2022 के तहत धारा 363, 376 भादवि और 3/4 पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले में हापुड़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 22 जून 2022 को ही न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया था। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई के दौरान मॉनिटरिंग सेल हापुड़ और अभियोजन विभाग ने गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा प्रभावी पैरवी के जरिए अभियोजन पक्ष का पक्ष मजबूती से रखा।
इस पूरी प्रक्रिया में अभियोजन विभाग के शासकीय अधिवक्ता हरेन्द्र कुमार त्यागी, विवेचक उप-निरीक्षक धारा सिंह, पैरोकार मुख्य आरक्षी मोनू मलिक और कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल प्रशान्त पाण्डेय का विशेष योगदान रहा।
हापुड़ पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपी को सजा दिलाने में सफलता मिली है। पुलिस की इस कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है। इस फैसले से अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के जरिए सजा सुनिश्चित करने के प्रयासों को बल मिला है।