हापुड़ में पेंशनर्स को बड़ी राहत, शिविर में मौके पर ही बने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, जानें पूरी प्रक्रिया
हापुड़ में जिलाधिकारी कविता मीना की अध्यक्षता में डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में दर्जनों पेंशनर्स के प्रमाण पत्र मौके पर बनाए गए और उन्हें जीवन प्रमाण ऐप, बायोमेट्रिक व फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया समझाई गई।
हापुड़ में पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र शिविर आयोजित किया गया।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पेंशनभोगियों को बैंकों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। जिलाधिकारी कविता मीना की उपस्थिति, अध्यक्षता और मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में बुजुर्ग पेंशनर्स को डिजिटल तकनीक के माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इस दौरान दर्जनों पेंशनभोगियों के डिजिटल प्रमाण पत्र मौके पर ही तैयार किए गए।
शिविर का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ पेंशनभोगियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र यानी जीवन प्रमाण की सुविधा का इस्तेमाल करना सिखाना था। इसके जरिए पेंशनर्स घर बैठे या नजदीकी केंद्र पर जाकर आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इससे उन्हें प्रमाण पत्र जमा करने के लिए लंबी लाइनों में लगने और बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शिविर में बुजुर्ग पेंशनभोगियों की सहायता के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए। तकनीकी टीम के सहयोग से शिविर में पहुंचे दर्जनों पेंशनर्स के डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र तत्काल तैयार किए गए। जिलाधिकारी कविता मीना ने स्वयं शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और वहां मौजूद बुजुर्गों से बातचीत कर सुविधा के संबंध में उनका फीडबैक भी लिया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी कविता मीना ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य आम जनता, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सरल बनाना है। डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (जीवन प्रमाण) ऐसी ही एक सुविधा है, जिसके माध्यम से पेंशनभोगियों को अब कड़ाके की ठंड या बीमारी की स्थिति में भी बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनपद के शत-प्रतिशत पेंशनभोगियों को इस तकनीक का लाभ मिले।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने पेंशनर्स के साथ उनके परिजनों को भी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाने और जमा करने की प्रक्रिया समझाई। उन्हें 'जीवन प्रमाण' ऐप के इस्तेमाल के साथ बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरा पहचान प्रणाली के जरिए प्रमाण पत्र तैयार करने, डाउनलोड करने और सबमिट करने की जानकारी सरल भाषा में दी गई।
शिविर में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, कोषागार विभाग के कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय पेंशनभोगी मौजूद रहे। बुजुर्गों ने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को समझने और मौके पर ही प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन के प्रयास की सराहना की। इस पहल के जरिए पेंशनभोगियों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने और जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया गया।