एटा में संयुक्त किसान मोर्चा का जेल भरो आंदोलन, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
एटा में संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र-राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जेल भरो आंदोलन किया और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा।
तस्वीर में एटा की सड़क पर उत्तर प्रदेश किसान सभा (AIKS) और संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 'जेल भरो आंदोलन' के तहत हाथों में लाल झंडे थामे और बैनर लेकर पैदल मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी नजर आ रहे हैं।
सोमवार दोपहर एटा में संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जेल भरो आंदोलन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जीटी रोड स्थित शहीद पार्क में एकत्रित हुए। इसके बाद पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
राष्ट्रीय आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में किसानों ने सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाईं।
मोर्चा की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये से कम नहीं किए जाने, काम के घंटे 8 निर्धारित करने और ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित करने की मांग शामिल रही। किसानों ने सभी फसलों के लिए लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, कर्ज मुक्ति और पर्याप्त खाद की आपूर्ति की भी मांग की। मोर्चा ने अमेरिका के साथ मुफ्त व्यापार समझौते को भारत के किसानों और मजदूरों के लिए विनाशकारी बताया।
प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा को बहाल करने, साल में 200 दिन काम और 700 रुपये मजदूरी की गारंटी देने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही चारों लेबर कोड्स को रद्द करने, बिजली निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को पूरी तरह समाप्त करने तथा मूल्य वृद्धि वापस लेने की मांग की गई। खाद की किल्लत दूर करने और सब्सिडी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भूमिहीन ग्रामीण गरीबों को खेती और घर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने की मांग रखी। वन में रहने वाले आदिवासी, दलितों और अन्य भूमिहीन गरीबों को भी भूमि आवंटित करने की मांग की गई।
जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग भी आंदोलन में प्रमुखता से उठाई गई। विशेष रूप से ग्राम बदरिया, रारपट्टी न० कदम, न० धनी, मिर्जापुर सई, चिंतापुर और घिलौआ में पेयजल की समस्या का मुद्दा उठाया गया, जहां चकोरी फैक्ट्री और अन्य कारणों से पानी खारा है।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के बाद मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय आह्वान के तहत हुए इस जेल भरो आंदोलन में किसानों ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी मांगों और समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।