एटा में बुखार का प्रकोप, 500 बीमार और मौतों का दावा
हत्सारी गांव में वायरल और डेंगू के संदिग्ध मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप लगाकर मरीजों का इलाज कर रही हैं।
एटा के हत्सारी गांव में स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल वैन से जांच कराते ग्रामीण।
एटा के अलीगंज क्षेत्र के हत्सारी गांव में बुखार के प्रकोप से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने करीब 500 लोगों के बीमार होने और 5 से 10 मौतों का दावा किया है। डेंगू-मलेरिया से मौतों की बात भी कही जा रही है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सोमवार को मोबाइल वैन यूनिट की टीम ने 78 मरीजों की जांच की, जिनमें 38 बुखार और जुकाम से पीड़ित मिले। 22 मरीजों की जांच में एक डेंगू संदिग्ध पाया गया।
ग्रामीण गौरव का दावा है कि गांव में बुखार का प्रकोप व्यापक रूप से फैल चुका है और करीब 500 लोग इसकी चपेट में हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5 से 10 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने इनमें से कई मौतों को डेंगू और मलेरिया से जोड़ते हुए चिंता जताई। ग्रामीणों के अनुसार, कई परिवारों में एक से अधिक सदस्य बीमार हैं। हालांकि, बीमार लोगों की वास्तविक संख्या और मौतों के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
गांव निवासी विजेंद्र कुमार ने अपनी बेटी की मौत का दर्द साझा करते हुए बताया कि उसे बुखार आया था। हालत बिगड़ने पर वह उसे तत्काल अलीगंज के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। विजेंद्र के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के दौरान बेटी की हालत और बिगड़ गई। उन्होंने दावा किया कि बुखार की वजह से उनकी बेटी के दिमाग की नस फट गई, जिससे उसकी मौत हो गई। विजेंद्र ने बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी अभी बीमार हैं।
विजेंद्र कुमार ने यह भी दावा किया कि गांव में बुखार से पीड़ित जिन लोगों की खून की जांच कराई जा रही है, उनमें से ज्यादातर को डेंगू बताया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं कराने के सवाल पर उन्होंने आरोप लगाया कि वहां मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इसी कारण वह अपनी बेटी को अलीगंज के निजी अस्पताल लेकर गए थे। हालांकि, गांव में डेंगू के मामलों और मौतों के कारणों को लेकर उनके दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गांव की ज्योति ने बताया कि उन्हें पिछले तीन-चार दिनों से बुखार है। वह फिलहाल गांव में ही उपचार करा रही हैं। उनके मुताबिक, बुखार बार-बार लौट रहा है और पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है। गांव के अन्य ग्रामीण भी बुखार से परेशान बताए जा रहे हैं।
रानी ने बताया कि बुखार आने पर उन्होंने अलीगंज के निजी चिकित्सक डॉ. गौरव को दिखाया था। उनके मुताबिक, चिकित्सक ने उन्हें डेंगू बताया था और उस समय उनकी प्लेटलेट्स करीब 85 हजार थीं। रानी ने बताया कि चार दिन तक निजी अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद उन्हें खास फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें फर्रुखाबाद रेफर कर दिया गया, जहां वह करीब पांच दिन भर्ती रहीं। रानी के अनुसार, फर्रुखाबाद में उपचार के बाद अब उनकी हालत में कुछ सुधार है। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी बीमार हैं और पूरा परिवार बीमारी की चपेट में है।
गांव निवासी कल्पना ने बताया कि उन्हें सर्दी-जुकाम के साथ बुखार है और वह गांव में ही उपचार करा रही हैं। उनके मुताबिक, गांव के चिकित्सक ने इसे वायरल बुखार बताया है। ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, बुखार के साथ सर्दी-जुकाम की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। बीमारी की सही वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
हत्सारी गांव में बुखार के प्रकोप को लेकर एटा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बीमारी की सूचना मिलते ही गांव में लगातार स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। स्वास्थ्य टीमें मरीजों की जांच-पड़ताल कर रही हैं और उन्हें आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मुताबिक, अब तक तीन बार जनपद स्तरीय मोबाइल वैन यूनिट की स्वास्थ्य टीम को गांव में भेजा जा चुका है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अलीगंज के चिकित्साधीक्षक को भी निर्देशित किया गया है। उनके स्तर से भी स्वास्थ्य टीम गांव में कार्यरत है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
एटा मुख्यालय से पहुंची मोबाइल वैन यूनिट के चिकित्सक डॉ. शिवम यादव ने बताया कि सोमवार को हत्सारी गांव में कुल 78 मरीजों की जांच की गई। इनमें 38 मरीज बुखार और जुकाम से पीड़ित मिले। इन मरीजों में से 22 की जांच कराई गई, जिसमें एक मरीज डेंगू का संदिग्ध पाया गया। चिकित्सक के मुताबिक, संदिग्ध मरीजों की पहचान कर आवश्यक जांच कराई जा रही है।
डॉ. शिवम यादव ने बताया कि मोबाइल वैन यूनिट पिछले तीन-चार दिनों से लगातार गांव पहुंच रही है। इससे पहले दो दिनों में टीम ने करीब 200 लोगों की जांच की थी। इनमें लगभग 50 मरीज वायरल फीवर से पीड़ित मिले थे। चिकित्सक के अनुसार, उस दौरान जांच में तीन से चार मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इन मरीजों को बेहतर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अलीगंज रेफर किया गया।
उन्होंने बताया कि मोबाइल यूनिट में सभी तरह के मरीजों की जांच की जा रही है, लेकिन उनकी विशेष ड्यूटी बुखार के मरीजों की जांच और उपचार के लिए लगाई गई है। डॉ. शिवम यादव के मुताबिक, अब तक की जांच में ज्यादातर मरीज वायरल फीवर से पीड़ित मिले हैं, जबकि डेंगू के मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। मोबाइल वैन गांव में लगातार पहुंच रही है और मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रधान प्रशासक ओमवीर राठौर ने बताया कि गांव में मच्छरों की रोकथाम और साफ-सफाई के लिए उनके स्तर से करीब तीन से चार बार फॉगिंग कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गांव में लगातार टीमें भेजी जा रही हैं और सफाई का काम कराया जा रहा है। ओमवीर राठौर के मुताबिक, ब्लॉक स्तर से भी गांव में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। गांव में साफ-सफाई और फॉगिंग की कार्रवाई लगातार जारी है।
हत्सारी गांव में बीमारी को लेकर ग्रामीणों के दावों और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के बीच अंतर सामने आया है। ग्रामीण करीब 500 लोगों के बीमार होने और 5 से 10 लोगों की मौत का दावा कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक की गई जांच में ज्यादातर मरीज वायरल फीवर से पीड़ित मिले हैं। मोबाइल वैन यूनिट के चिकित्सक के अनुसार, पहले दो दिनों में करीब 200 लोगों की जांच के दौरान तीन से चार मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। वहीं, सोमवार को 78 मरीजों की जांच में 38 बुखार-जुकाम से पीड़ित मिले और 22 मरीजों की जांच में एक डेंगू संदिग्ध पाया गया। ग्रामीणों द्वारा बताई गई मौतों और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें मरीजों की जांच और उपचार में जुटी हैं, जबकि ग्राम पंचायत प्रशासन की ओर से फॉगिंग और साफ-सफाई कराए जाने की जानकारी दी गई है।