चंदौली में खुले में फेंके गए बायोमेडिकल वेस्ट और कचरे की स्थिति।

चंदौली में मेडिकल कचरे के खुले में मिलने की घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका परिषद डीडीयू नगर के एमआरएफ प्लांट में पहले भारी मात्रा में मेडिकल कचरा मिलने का मामला सामने आया था। अब गोधना बाईपास चौराहे से आगे एक निजी अस्पताल के पास भी बायोमेडिकल वेस्ट पाए जाने की जानकारी मिली है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच मेडिकल कचरे के निस्तारण और जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन खबर प्रकाशित होने के करीब एक सप्ताह बाद भी उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच और कार्रवाई के परिणाम स्पष्ट नहीं हैं।


अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया या नहीं, कचरे के स्रोत की पहचान हुई या नहीं और किसी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की गई या नहीं। इन सवालों पर स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है, ताकि जांच की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की वास्तविक जानकारी मिल सके।

खुले में पड़े बायोमेडिकल वेस्ट से लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसमें इस्तेमाल की गई सुइयों और दूषित चिकित्सा सामग्री से चोट लगने तथा संक्रमण का जोखिम रहता है। इससे सफाईकर्मियों, बच्चों और अन्य लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मेडिकल कचरे का सुरक्षित निस्तारण और उसे खुले में छोड़ने वाले स्रोत की पहचान करना आवश्यक है।

इस मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण है। संबंधित विभागों को मामले की जांच कर अपनी-अपनी जिम्मेदारी के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

मेडिकल कचरा मिलने की घटनाओं के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि जांच कहां तक पहुंची और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आश्वासन के बाद क्या कदम उठाए गए। जब तक संबंधित विभाग इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं देते, तब तक मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल बने रहेंगे।

Tags: