चंदौली: दलित महिला से घर में घुसकर छेड़छाड़ और जातीय उत्पीड़न, पुलिस पर लापरवाही का आरोप
चंदौली के लटौरा गांव में दलित महिला के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़ और जातीय उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बाद भी कार्यवाही न होने से पीड़ित परिवार दहशत में है। क्या है पूरा मामला और क्या कह रही है पुलिस?
तस्वीर में चंदौली के बबुरी थाना परिसर के बाहर एक महिला और पुलिस शिकायत पत्र की प्रति दिख रही है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के बबुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत लटौरा गांव से एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहां की एक अनुसूचित जाति की महिला ने गांव के ही तीन नामजद व्यक्तियों पर घर में जबरन घुसने, छेड़छाड़ करने, मारपीट करने, जातिसूचक गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि उसने पहले बबुरी थाने में और उसके बाद पुलिस अधीक्षक चंदौली के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई, परंतु अब तक आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई है।
पीड़िता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, उसके पति एक सड़क दुर्घटना के बाद रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण दिव्यांग हैं। आरोप है कि 4 जुलाई 2026 की शाम को तीनों आरोपी अचानक घर में घुस आए और दिव्यांग पति के सामने अभद्र व्यवहार करने लगे। महिला का दावा है कि विरोध करने पर आरोपियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की और मारपीट की, जिससे उसे चोटें आईं तथा उसकी चूड़ियां भी टूट गईं। शोर मचाने पर जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो आरोपी पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से फरार हो गए।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पुलिस की सुस्त कार्यवाही के कारण आरोपी बेखौफ घूम रहे हैं और उसका परिवार निरंतर दहशत में जीवन व्यतीत कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कठोर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
इस संदर्भ में पूछे जाने पर थाना प्रभारी बबुरी ने सभी आरोपों को निराधार और असत्य करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सत्य नहीं पाए गए हैं। वहीं, दूसरी ओर पीड़िता अपने शरीर पर चोट के निशानों का हवाला देते हुए घटना की पुष्टि के लिए परिजनों और ग्रामीणों के गवाह होने का दावा कर रही है। फिलहाल, दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों के बीच मामले की वास्तविकता निष्पक्ष पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।