बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए, जिन्होंने हाल ही में हुई मारपीट की घटना के बाद तीमारदारों और डॉक्टरों के विवाद पर कॉलेज प्रशासन द्वारा की गई सख्त कार्रवाई की जानकारी दी।   

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज की मौत के बाद पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई मारपीट के मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। 6 अक्टूबर की रात हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। जांच में आरोप सिद्ध होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन जूनियर डॉक्टरों पर 25 से 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया है। साथ ही तीनों को एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया गया है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ताजा मामला सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज की मौत के बाद सामने आया। मरीज की मौत के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। इसी दौरान 6 अक्टूबर की रात मारपीट हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में कुछ जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मरीज के परिजनों के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।

घटना के बाद तीमारदारों ने पुलिस और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विवाद की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई। कमेटी के सामने आरोपित जूनियर डॉक्टरों पर लगे आरोप सिद्ध हुए, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।

कॉलेज प्रशासन ने तीनों जूनियर डॉक्टरों पर 25 से 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाने के साथ उन्हें एक सप्ताह के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आरोपित डॉक्टरों की एक महीने तक मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराने का भी फैसला किया गया है। तीनों डॉक्टरों से लिखित शपथ पत्र भी लिया गया है कि वे दोबारा इस तरह की घटना में शामिल नहीं होंगे।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले कई वर्षों से तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद तथा मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। आरोप है कि पहले ऐसे मामलों में किन्हीं कारणों से मामला संभाल लिया जाता था और मारपीट का सामना करने वाले तीमारदारों को न्याय नहीं मिल पाता था। ऐसे में इस बार कॉलेज प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को मामले में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस संबंध में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि कॉलेज प्रशासन चाहता है कि मरीजों के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार किया जाए, आपसी सामंजस्य बनाए रखा जाए और उनके इलाज में पूरा सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश ऐसी स्थिति बनती है तो इसकी सूचना तत्काल दी जानी चाहिए।

प्राचार्य के अनुसार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की छवि सुधारने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। तीन जूनियर डॉक्टरों के निलंबन, आर्थिक दंड, एक महीने की मनोचिकित्सकीय काउंसलिंग और लिखित शपथ पत्र के फैसले के जरिए कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है।

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