एटा में आशा कार्यकर्ताओं की उठी मांग, विधायक को सौंपा ज्ञापन
‘आपकी आवाज’ संगठन ने विधायक वीरेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और मानदेय 18 हजार रुपये करने की मांग की।
एटा में 'आपकी आवाज' संगठन की प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा देवी और अन्य आशा कार्यकर्ताओं ने विधायक वीरेंद्र सिंह को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से संबंधित मांग पत्र सौंपा।
एटा में आशा एवं आशा संगिनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं को विधानसभा तक पहुंचाने की मांग उठी है। ‘आपकी आवाज’ सामाजिक संगठन की प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा देवी ने विधायक वीरेंद्र सिंह को मांग पत्र सौंपकर कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग की। इसके साथ ही टीकाकरण, प्रसव, नसबंदी, संचारी रोग सर्वेक्षण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की मांग भी रखी गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने वाली आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर ‘आपकी आवाज’ सामाजिक संगठन ने यह पहल की है। संगठन ने विधायक वीरेंद्र सिंह से आग्रह किया है कि इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा के पटल पर उठाया जाए, ताकि सरकार का ध्यान कार्यकर्ताओं की समस्याओं की ओर आकर्षित हो सके।
संगठन की ओर से सौंपे गए मांग पत्र में कहा गया है कि आशा कार्यकर्त्रियां स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और अभियानों को आम लोगों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद नियुक्ति के बाद से आज तक उनके जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। संगठन ने विधायक से उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का अनुरोध किया है।
मांग पत्र में सबसे प्रमुख मांग आशा एवं आशा संगिनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करने की है। संगठन का कहना है कि इन कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य लगातार कराए जाते हैं। उनकी सेवाओं और जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाना चाहिए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि जब तक आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं किया जाता, तब तक नियुक्ति की तिथि से उन्हें 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन द्वारा तय तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर निर्धारित न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए।
मासिक प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग करते हुए संगठन ने सरकार की ओर से वर्तमान में दी जा रही दो हजार रुपये की राशि को बढ़ाकर चार हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा आशा बहनों को मिलने वाली एक अन्य 1500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये करने की मांग भी की गई है।
टीकाकरण अभियान में ड्यूटी के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में भी बढ़ोतरी की मांग की गई है। मांग पत्र के अनुसार, वर्तमान में आशा कार्यकर्ताओं को टीकाकरण की ड्यूटी के लिए 150 रुपये दिए जाते हैं। संगठन ने इसे बढ़ाकर 500 रुपये करने की मांग रखी है।
बच्चों के टीकाकरण से जुड़े कार्यों के लिए भी अधिक प्रोत्साहन राशि देने का अनुरोध किया गया है। संगठन के अनुसार, बच्चे को एमआरओ प्रथम लगवाने पर आशा कार्यकर्ता को वर्तमान में 100 रुपये मिलते हैं, जिन्हें बढ़ाकर 500 रुपये करने की मांग की गई है। वहीं, बच्चे को एमआरओ द्वितीय लगवाने पर मिलने वाली 50 रुपये की राशि को बढ़ाकर 200 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रसव के बाद नवजात और मां की देखभाल के लिए किए जाने वाले कार्यों का उल्लेख करते हुए संगठन ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद आशा कार्यकर्ता 42 दिन तक सात विजिट करती हैं। इसके लिए वर्तमान में उन्हें 250 रुपये दिए जाते हैं। मांग पत्र में इस राशि को बढ़ाकर 500 रुपये करने की मांग की गई है।
एचबीवाईसी के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन के मुताबिक, इस कार्य के लिए आशा कार्यकर्ताओं को वर्तमान में 50 रुपये मिलते हैं। इसे बढ़ाकर 200 रुपये करने की मांग की गई है।
महिला एवं पुरुष नसबंदी कराने में सहयोग के लिए मिलने वाली राशि बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है। मांग पत्र के अनुसार, इस कार्य के लिए वर्तमान में 300 रुपये दिए जाते हैं। संगठन ने इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का अनुरोध किया है।
संचारी रोग सर्वेक्षण के लिए मिलने वाली राशि में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की गई है। संगठन ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को इस कार्य के लिए एक माह के 200 रुपये मिलते हैं। मांग पत्र में इसे बढ़ाकर 2000 रुपये करने की मांग रखी गई है।
प्रत्येक डिलीवरी पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन के अनुसार, वर्तमान में आशा बहनों को हर डिलीवरी पर 600 रुपये दिए जाते हैं। इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने की मांग की गई है।
मांग पत्र में आयुष्मान कार्ड, संचारी रोग, गैर-संचारी रोग, कुष्ठ रोग और आभा कार्ड सहित स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने विधायक को अवगत कराया कि इन योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके सहयोग के बिना स्वास्थ्य विभाग की अनेक योजनाओं का पूरी तरह संचालन संभव नहीं है।
संगठन का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों, सर्वेक्षणों, टीकाकरण, प्रसव पूर्व एवं प्रसव बाद देखभाल तथा स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार जैसे कार्य लगातार कराए जाते हैं। इसके बावजूद इन जिम्मेदारियों के अनुपात में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पर्याप्त नहीं है।
‘आपकी आवाज’ सामाजिक संगठन की प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा देवी ने विधायक वीरेंद्र सिंह से आग्रह किया है कि आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं की समस्याओं और मांगों को विधानसभा के पटल पर रखा जाए। संगठन ने मांग पत्र के अंत में इन मांगों पर गंभीरता से पुनर्विचार कराने और कार्यकर्ताओं के हित में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। अब संगठन की मांगों के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं के वेतन, सेवा संबंधी अधिकारों और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यों के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का मुद्दा विधानसभा तक पहुंचाने की मांग की गई है।