ऋषभदेव में हर्षोल्लास से मना श्रेयांस नाथ निर्वाण महोत्सव और रक्षा बंधन पर्व
खेरवाड़ा के ऋषभदेव कांच मंदिर में श्रेयांस नाथ निर्वाण महोत्सव और रक्षा बंधन पर्व मनाया गया, मुनियों की रक्षा की कथा भी सुनाई गई।
तस्वीर में ऋषभदेव के कांच के मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेते हुए समाजजन दिखाई दे रहे हैं।
ऋषभदेव कांच के मंदिर में विराजित उपाध्याय शुभम सागर महाराज एवं कवि मुनि सक्षम सागर जी महाराज के सानिध्य में भगवान श्रेयांस नाथ का निर्वाण महोत्सव एवं रक्षा बंधन पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
उपाध्याय शुभम सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए बताया कि आज ही के दिन हस्तिनापुर में अकम्पनाचार्य सहित सात सौ मुनियों पर उपसर्ग किया गया था और सभी मुनियों को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया था। उन्होंने विस्तार से बताया कि मुनि विष्णु महाराज ने किस प्रकार मुनियों की रक्षा कर जिनशासन की सेवा की। इसी घटना की स्मृति में रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है।
समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन ने बताया कि आज झारखंड के सम्मेद शिखर में भगवान श्रेयांस नाथ को निर्वाण प्राप्त हुआ था। विद्वान पंडित पारस जैन ने मंत्रोच्चारण कराया। इसके बाद हंसमुख प्रेम चंद नागदा परिवार ने भगवान श्रेयांस नाथ की पूजा-अर्चना कर निर्वाण लड्डू चढ़ाया। इस अवसर पर अकम्पनाचार्य की पूजा भी की गई।
समाज के महामंत्री प्रदीप कुमार जैन ने बताया कि उपाध्याय शुभम सागर महाराज की पिच्छी पर हंसमुख नागदा परिवार ने स्वर्ण राखी तथा मुनि सक्षम सागर महाराज की पिच्छी पर भरत शीला गनोडिया परिवार ने रजत राखी भेंट की।
इस अवसर पर समाज के नगर सेठ राजमल कोठारी, अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार जैन, महामंत्री प्रदीप कुमार जैन, उपाध्यक्ष धन पाल भंवरा, सह मंत्री हेमंत भंवरा, वित्तमंत्री बसंती लाल भंवरा, धर्म मंत्री मुकेश गांधी, संपदा मंत्री राज कुमार गांधी, महावीर गंगावत, महावीर कोठारी, प्रकाश भाणावत, गुरुकुल के महामंत्री सुंदर लाल भाणावत, ट्रस्टी सुरेश कोठारी, सिदार्थ पंचोली, रमेश पटवारी, डॉक्टर प्रियेश भंवरा, सी पी भाणावत, नवयुवक मंडल अध्यक्ष अंकित भाणावत और महामंत्री तरुण सिसपुरिया सहित खेरवाड़ा, देवल, बड़ौदा, अहमदाबाद, राजकोट और उदयपुर सहित समाजजन उपस्थित रहे।
रक्षा बंधन पर्व और भगवान श्रेयांस नाथ के निर्वाण महोत्सव के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में समाजजनों ने पूजा-अर्चना और परंपरागत धार्मिक विधियों के माध्यम से पर्व मनाया।