मगवास में अनोखी परंपरा: ग्राम देवी की रजत मूर्ति पूजन के बाद ही बांधते हैं राखी
मगवास में रक्षाबंधन की अनोखी परंपरा आज भी कायम है, जहां ग्राम देवी की रजत मूर्ति की पूजा के बाद ही भाई-बहन राखी बांधते हैं।
तस्वीर में मगवास गांव के जोशी परिवार की ग्राम देवी की अलंकृत चांदी की मूर्ति, भोग की थाली और प्रज्वलित दीपक नजर आ रहे हैं।
झाड़ोल क्षेत्र के मगवास गांव में जोशी परिवार की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। रक्षाबंधन के अवसर पर परिवार के सदस्य ग्राम देवी की रजत मूर्ति का विधि-विधान से पूजन करने के बाद ही भाई-बहन को राखी बांधते हैं।
परंपरा के अनुसार ग्राम देवी की रजत प्रतिमा को परिवार के प्रत्येक घर में ले जाया जाता है। घर-घर श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इसके बाद ही भाई-बहन एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। परिवार के लोगों के अनुसार यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है और आज भी नई पीढ़ी पूरी आस्था के साथ इसे आगे बढ़ा रही है।
ग्राम देवी से जुड़ी एक आस्था की घटना भी ग्रामीणों के बीच विशेष रूप से चर्चित है। बताया जाता है कि एक बार ग्राम देवी की रजत मूर्ति चोरी हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी मूर्ति का पता नहीं चला। इसी दौरान परिवार के एक सदस्य को स्वप्न में माता ने दर्शन देकर मूर्ति को छिपाए जाने वाली जगह का संकेत दिया।
परिवार के अनुसार, बताए गए स्थान पर तलाश करने पर मूर्ति वहीं से बरामद हुई। इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों की माता के प्रति आस्था और भी गहरी हो गई।
आज भी रक्षाबंधन पर इस परंपरा का निर्वाह पूरे श्रद्धा-भाव से किया जाता है। परिवार इसे अपनी सदियों पुरानी विरासत और आस्था का प्रतीक मानता है।