सावन में गूंजी श्री एकलिंगनाथ की महिमा, राव दिलीप सिंह परिहार की स्तुति ने जगाई सनातन चेतना

राजसमंद में सावन के पावन अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के प्रदेश प्रवक्ता राव दिलीप सिंह परिहार की रचित "सावण सुदी श्री एकलिंगनाथ स्तुति" चर्चा का विषय बनी हुई है। शिवभक्ति, मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का समन्वय प्रस्तुत करने वाली यह रचना श्रद्धालुओं और साहित्य प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

Update: 2026-07-30 09:30 GMT

तस्वीर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के प्रदेश प्रवक्ता राव दिलीप सिंह परिहार नजर आ रहे हैं।

राजसमंद। सावन के पावन माह में जब शिवालयों में भक्तों की आस्था उमड़ रही है, "हर-हर महादेव" के जयघोष से वातावरण गुंजायमान है और भगवान शिव के जलाभिषेक का पुण्य पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, उसी बीच मेवाड़ की आराध्य परंपरा और सनातन संस्कृति को समर्पित एक ओजस्वी काव्य रचना श्रद्धालुओं और साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के प्रदेश प्रवक्ता राव दिलीप सिंह परिहार द्वारा रचित "॥ सावण सुदी श्री एकलिंगनाथ स्तुति ॥" में भगवान शिव शंकर परमेश्वर, मेवाड़ के आराध्य देव श्री एकलिंगनाथ जी, सावन माह की आध्यात्मिक महिमा तथा वीरता, धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का प्रभावशाली समन्वय प्रस्तुत किया गया है।

डिंगल–पिंगल शैली में रचित इस स्तुति में सावन मास की हरियाली, बिल्वपत्र अर्पण, गंगाजल से अभिषेक, रुद्राभिषेक, सोमवार व्रत और शिव उपासना के आध्यात्मिक महत्व को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। इसके साथ ही मेवाड़ की आन-बान-शान, महाराणा प्रताप के अदम्य स्वाभिमान, चेतक की वीरता तथा "हर-हर महादेव" के रणघोष को भी ओजपूर्ण शब्दों में स्थान दिया गया है।

रचना में भगवान श्री एकलिंगनाथ जी को मेवाड़ के अधिपति एवं धर्मरक्षक के रूप में नमन करते हुए समाज को सत्य, सेवा, त्याग, प्रकृति संरक्षण, राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया है। सावन के इस पावन अवसर पर यह स्तुति शिवभक्ति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का भी स्मरण कराती है।

राव दिलीप सिंह परिहार ने कहा कि सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सदाचार, समाज सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का भी पावन अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से भगवान शिव एवं श्री एकलिंगनाथ जी की आराधना कर राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण की प्रार्थना करने का आह्वान किया।

उन्होंने अपनी रचना "॥ सावण सुदी श्री एकलिंगनाथ स्तुति ॥" में सावन के सौंदर्य, भगवान शिव के विविध स्वरूप, श्री एकलिंगनाथ जी की महिमा, मेवाड़ की वीर परंपरा, हल्दीघाटी के रण, महाराणा प्रताप, चेतक, धर्म, सत्य, शौर्य, त्याग, गौ, गंगा, गिरिराज, रुद्राध्याय, सोमवार व्रत तथा शिवभक्ति के माध्यम से सनातन संस्कृति, राष्ट्रधर्म और आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश दिया है। स्तुति का समापन उन्होंने भगवान श्री एकलिंगनाथ जी से सावन को मंगलमय बनाने की प्रार्थना तथा "हर-हर महादेव", "श्री एकलिंगनाथाय नमः", "जय मेवाड़", "जय धर्म" और "जय शिव शंभु" के उद्घोष के साथ किया है।

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