आरक्षित सीट आते ही बदले समीकरण, दावेदारों के चेहरे उतरे, मावली में चुनावी हलचल तेज
मावली में सीट आरक्षित होते ही चुनावी समीकरण बदल गए। कई दावेदार मायूस हुए, जबकि कुछ ने पढ़े-लिखे और समझदार प्रत्याशी को चुनने की तैयारी शुरू की।
राजस्थान में निकाय और पंचायती राज चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होने लगी है। चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की नजर पूर्व में आरक्षण की लॉटरी पर टिकी हुई थी। चुनाव से पहले अलग-अलग वर्गों के लिए सीटों का आरक्षण तय किया गया, लेकिन मावली की सीट आरक्षित होते ही कई दावेदारों के चेहरे पर मायूसी छा गई।
मावली की सीट आरक्षित होने के बाद उन लोगों की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ा है, जो लंबे समय से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। कुछ लोग काफी पहले ही बाहुबली लोगों से समझौते कर आए थे, जबकि कुछ लोगों ने चुनावी खर्च भी शुरू कर दिया था और इसके लिए फंड अलग रख दिया था।
आरक्षण के बाद जहां कई संभावित दावेदारों में निराशा देखने को मिली, वहीं कुछ लोगों में खुशी का माहौल भी नजर आया। ऐसे लोग अब कमर कसने को तैयार हैं और उनका कहना है कि इस बार पढ़ा-लिखा और समझदार व्यक्ति ही चुना जाएगा, न कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर काम करने वाला।
मावली में सीट के आरक्षण के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी समीकरणों में बदलाव देखने को मिल रहा है। अब आरक्षित वर्ग के दावेदारों की सक्रियता पर चुनावी माहौल की दिशा निर्भर करेगी।