तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में पर्यूषण महापर्व के दौरान आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में खड़े लोग और महिलाएं दिखाई दे रहे हैं।

खेरोदा, 11 सितंबर 2026। पावन परिवर्तन चातुर्मास 2026 के अंतर्गत पर्यूषण महापर्व के अवसर पर वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जैन स्थानक भवन में धर्मसभा और विविध आध्यात्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान महावीर जन्म वांचन महोत्सव और ‘बड़ा कल्प’ का वाचन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। वहीं श्रावक-श्राविकाओं द्वारा महामंत्र नवकार का अखंड जाप निरंतर किया जा रहा है।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य गुरुदेव कोमल मुनि ने कहा, “जिसका काम उसी को साजे, दूजा करे तो डंका बाजे।” उन्होंने कहा कि यह कहावत मानव जीवन के लिए अत्यंत मार्मिक और विचारणीय है। मनुष्य को अपने काम से काम रखना चाहिए, लेकिन वह अक्सर दूसरों की निंदा, चुगली और दुर्विचारों में उलझा रहता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को आत्म-मंथन करना चाहिए कि वह कहीं पशु तुल्य आचरण तो नहीं कर रहा। दूसरों की अच्छाइयों को अपनाना और बुराइयों का त्याग करना ही सच्चा मानव धर्म है।

मुनि श्री ने कहा कि धर्म-साधना ही मनुष्य को नर से नारायण बनाती है। जब तक सम्यक् श्रद्धा और ध्यान नहीं होगा, तब तक आत्मा का वास्तविक विकास और कल्याण संभव नहीं है।

सभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने प्रेरणा देते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने संयम पथ पर अग्रसर होने वाले साधकों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी उठाई थी, उसी प्रकार समाज को भी संयम मार्ग अपनाने वालों और उनके परिवारों का संबल बनकर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

हर्षित मुनि ने नवकार महामंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि इस संसार में नवकार मंत्र से बड़ा कोई जाप नहीं है। इसी पावन भावना के साथ श्रावक-श्राविकाओं द्वारा अखंड नवकार महामंत्र का जाप निरंतर किया जा रहा है।

वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा और मंत्री मुकेश डांगी ने तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए बताया कि पर्यूषण पर्व के दौरान समाज में तप-साधना की बयार बह रही है। सुशीला कूकड़ा ने 19 उपवास, सरोज कूकड़ा ने 11 उपवास तथा विरेन कूकड़ा और भाविक मेहता ने तेला यानी 3 उपवास की उत्कृष्ट तपस्या कर आत्म-साधना का मार्ग प्रशस्त किया है।

समाज के सभी श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वियों के त्याग और अखंड जाप में सम्मिलित सभी महानुभावों की भावपूर्वक सुख-साता पूछी और अनुमोदना की। पर्यूषण महापर्व के अवसर पर आयोजित धर्मसभा, अखंड नवकार जाप और तप-साधना के माध्यम से वर्द्धमान जैन श्रावक संघ में त्याग, संयम और आत्म-साधना के संस्कारों का संदेश दिया गया।

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