खेरवाड़ा: पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा, मनाया मोक्ष कल्याणक
शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने चढ़ाया निर्वाण लड्डू, पंडित सुशील जैन ने लोभ और तृष्णा त्यागने का दिया संदेश।
तस्वीर में शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु।
खेरवाड़ा में दिगंबर जैन समाज के महापर्व पर्वाधिराज पर्युषण के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। तहसील रोड स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अध्यक्ष रमेश चंद्र कोठारी एवं महामंत्री भूपेंद्र जैन के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
शनिवार को जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर 1008 पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक भी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। जिनालय के श्रावक-श्राविकाओं ने विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेकर भगवान के गुणों का स्मरण किया और निर्वाण लड्डू समर्पित किया।
मंदिर में उपस्थित पंडित सुशील जैन ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि शरीर को बाहर से स्वच्छ करना आसान है, लेकिन मन और विचारों को लोभ, लालच, मायाचार (छल-कपट) एवं वासनाओं से मुक्त करना ही वास्तविक शौच धर्म है। उन्होंने कहा कि लालच और तृष्णा मनुष्य को असंतोष एवं दुखों की ओर ले जाती है। लोभ का पूर्ण अभाव होने पर ही आत्मा का निर्मल स्वभाव प्रकट होता है।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इससे पूर्व रात्रि में शांतिनाथ युवा परिषद के अध्यक्ष विक्रांत कोठारी एवं महामंत्री वैभव कोठारी के नेतृत्व में प्रश्न मंच सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में समाज के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उत्तम शौच धर्म के आयोजन के माध्यम से लोभ, लालच और तृष्णा से मुक्त होकर आत्मा के निर्मल स्वभाव की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया। इस दौरान समाजजनों ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर अपनी आस्था व्यक्त की।