अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में गूंजी वीरता और संवेदना, कवियों ने बांधा समां
खेरवाड़ा में 22 सितंबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य, वीर रस और भावनाओं की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को बांधे रखा। बेटियों, कर्ण, कृष्ण और महाराणा प्रताप पर कविताओं ने विशेष प्रभाव छोड़ा।
तस्वीर में खेरवाड़ा के कवि सम्मेलन के मंच पर माइक के सामने खड़े होकर काव्य पाठ करते हुए कवि और पीछे सोफे पर बैठे अन्य अतिथि नजर आ रहे हैं।
खेरवाड़ा। शा. दि. जैन युवा परिषद, खेरवाड़ा के तत्वावधान में 22 सितंबर को आयोजित भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के ख्यातनाम कवियों ने ओजस्वी, हास्यपूर्ण एवं भावनात्मक काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सम्मेलन में हास्य, वीर रस, सामाजिक सरोकारों तथा भगवान श्रीकृष्ण एवं कर्ण जैसे महान चरित्रों पर आधारित कविताओं ने विशेष प्रभाव छोड़ा। कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कवि कमलेश सहज (इंदौर) ने बेटियों के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य पर भावपूर्ण कविता पाठ करते हुए कहा, “हे ईश्वर! कुछ देने न देने, हर घर में एक बेटी देना। बेटी की आंख में कभी आंसू न आने दो, उसे भी विद्यालय जाने दो।” उन्होंने बेटियों की मुस्कान का महत्व बताते हुए कहा कि बेटी की मुस्कराहट में हजारों हीरे-मोती झरते हैं। उनकी संवेदनशील प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कवि कुमार संभव (उज्जैन) ने कर्ण एवं भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र पर आधारित प्रभावशाली कविताओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुतियों में पौराणिक प्रसंगों, भावनाओं और जीवन मूल्यों का चित्रण देखने को मिला। श्रोताओं ने उनकी कविताओं को सराहा।
कवि सिद्धेश्वर सिद्धू (उदयपुर) ने हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता हंसी से लोटपोट हो गए। उनकी चुटीली और मनोरंजक कविताओं ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
कवि अंशुमन आजाद ने मेवाड़ की वीरभूमि, महाराणा प्रताप के शौर्य और राजपूत वीरों के बलिदान पर ओजस्वी काव्य पाठ करते हुए श्रोताओं में वीर रस का जोश भर दिया। उन्होंने अपनी कविता में मेवाड़ की आन-बान और स्वाभिमान का चित्रण करते हुए कहा, “मेवाड़ी प्रहार झेलते छाती पर, मेवाड़ी कर्ज चुकाने को वीरों की छाती भड़क उठी। राजपूतों के संग वीरों में जागी मात भवानी है। कण-कण माटी गूंज उठी, मेवाड़ी माटी मुगलों के दरबार में मुजरा नहीं करेगी।”
महाराणा प्रताप के शौर्य और मेवाड़ की गौरवगाथा पर आधारित उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं में देशभक्ति और वीरता का उत्साह भर दिया।
कवि विपिन वत्सल एवं छत्रपाल शिवाजी ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को लंबे समय तक बांधे रखा। वहीं अन्य कवियों ने भी अपनी विशिष्ट शैली और शानदार प्रस्तुतियों से सम्मेलन को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि बलवंत बल्लू भी शरीक हुए। स्थानीय समाज की ओर से उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया। उनके प्रति समाजजनों ने विशेष आदर एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष रमेश चंद्र कोठारी, महामंत्री भूपेंद्र जैन, सहमंत्री भारत जैन, युवा परिषद अध्यक्ष विक्रांत कोठारी एवं महामंत्री वैभव कोठारी सहित अनेक धर्मावलंबी उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन के सफल आयोजन पर युवा परिषद ने सभी कवियों, अतिथियों एवं समाजजनों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से बलवंत बल्लू जी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके स्नेह, प्रेम एवं मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम का आयोजन शा. दि. जैन युवा परिषद, खेरवाड़ा की ओर से किया गया।