खेरोदा में मेवाड़ के पारंपरिक लोकनाट्य गवरी का भव्य मंचन
गांधी चौक में बग्गड़ से आए कलाकारों ने विविध प्रसंगों की जीवंत प्रस्तुतियों के जरिए धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष किया।
तस्वीर में खेरोदा के गांधी चौक में गवरी लोकनाट्य के दौरान कलाकार प्रस्तुति दे रहे हैं।
खेरोदा में मेवाड़ की समृद्ध लोक संस्कृति के प्रतीक पारंपरिक लोकनाट्य ‘गवरी’ का भव्य मंचन किया गया। कस्बे के गांधी चौक में बग्गड़ से आए गवरी कलाकारों ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान के तहत विभिन्न पारंपरिक प्रसंगों और खेलों की जीवंत प्रस्तुतियां दीं। गवरी देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़े। मांदल और थाली की गूंज के बीच कलाकारों की प्रस्तुतियों से गांधी चौक भक्ति और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया।
मंचन के दौरान कलाकारों ने कालू कीर, बंजारा, चौथ माता, राजा-रानी, कालिका माता, चोर-पुलिस, हत्या डाडमा और कान्हा-गुजरी जैसे पारंपरिक खेलों का सजीव मंचन किया। कलाकारों के अभिनय, संवाद और पारंपरिक वेशभूषा ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। प्रस्तुतियों के दौरान लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
गवरी दल ने मनोरंजन के साथ अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर भी कटाक्ष किया। कलाकारों ने सामाजिक सुधार और सद्भाव का संदेश देते हुए लोकनाट्य की सामाजिक भूमिका को सामने रखा। दिनभर चले आयोजन में स्थानीय ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्र के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
आयोजन के दौरान मेवाड़ की इस प्राचीन लोक कला परंपरा की प्रस्तुतियों को ग्रामीणों ने सराहा। पारंपरिक पात्रों, संवादों और खेलों के माध्यम से हुए गवरी मंचन ने धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक संदेशों को भी प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाया।