तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा के दौरान उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि, संतगण और उपस्थित श्रावक नजर आ रहे हैं।

खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि ने सरलता को जीवन की उच्चतम चेतना बताते हुए धर्म के प्रति दृढ़ निष्ठा रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर अठाई तप की कठिन साधना पूर्ण करने वाली तपस्वी दीपिका मारू का शॉल ओढ़ाकर बहुमान किया गया। धर्मसभा में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए।

26 अगस्त 2026 को धर्मसभा को संबोधित करते हुए उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि ने कहा कि सरलता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि जीवन की उच्चतम चेतना है। संसार हमें जटिल बनना सिखाता है, लेकिन अध्यात्म का पहला नियम सहजता है। सरलता का सच्चा अर्थ केवल सादा वस्त्र या खान-पान नहीं, बल्कि चित्त का निष्कपट और अनावरित होना है। अहंकार के विसर्जन तथा मन, वचन और कर्म की एकता से ही जीवन में सच्चा आनंद और शांति प्राप्त होती है।

धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि एवं अरुण मुनि ने गुरु निष्ठा पर बल देते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा प्रगाढ़ होनी चाहिए। गुरु वही हैं जो क्रिया प्रदर्शनी के बजाय निर्जरा प्रदर्शनी हों और राग-द्वेष व लोभ से मुक्त हों। उन्होंने सभी को धर्म के प्रति दृढ़ श्रद्धावान बनने की प्रेरणा दी।

इस दौरान क्षेत्र में तप-आराधना को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। इसी क्रम में अठाई तप यानी आठ उपवास की कठिन साधना पूर्ण करने पर तपस्वी दीपिका मारू पत्नी दीपक मारू का गुरुदेव एवं समाज की ओर से स्वागत और अभिनंदन किया गया। उन्हें शॉल ओढ़ाकर बहुमान किया गया।

प्रवचन एवं स्वागत समारोह में खेरोदा सहित भटेवर, मेनार, अमरपुरा खालसा, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और फतहनगर से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। उन्होंने तपस्वी की अनुमोदना की और धर्मलाभ लिया।

इस अवसर पर खेरोदा जैन स्थानक भवन में तपस्वी के स्वागत का दृश्य कैमरे में भी दर्ज किया गया। फोटो: बुद्धि प्रकाश पाराशर, खेरोदा।

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