तस्वीर में खेरोदा में धर्मसभा के दौरान मंच पर विराजमान जैन मुनि धर्मोपदेश देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

खेरोदा, 19-09-2026। जैन धर्म के पावन पर्व पर्युषण के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धेय गुरुदेव कोमल मुनि जी ने श्रद्धालुओं को आत्म-मंथन और जीवन में वास्तविक परिवर्तन की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सभी ने पर्युषण महापर्व बड़े हर्षोल्लास और आनंद के साथ मनाया, लेकिन विचारणीय प्रश्न यह है कि हमारे भीतर वास्तविक परिवर्तन कहां आया। पर्युषण केवल औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को संसार की अंधी दौड़ से खींचकर समता भाव में स्थिर करने और भीतर की ओर मोड़ने का पावन अवसर है।

कोमल मुनि महाराज ने कहा कि प्रत्येक श्रावक को यह चिंतन करना चाहिए कि प्रतिवर्ष पर्व के आगमन पर उसके विचारों और आचरण में कोई सकारात्मक बदलाव आया है या जीवन पूर्ववत ही चल रहा है। उन्होंने पर्युषण के वास्तविक उद्देश्य को जीवन में सच्चा परिवर्तन लाने से जोड़ते हुए आत्मनिरीक्षण को आवश्यक बताया।

परिवर्तन के मूल तत्व पर प्रकाश डालते हुए पूज्य मुनिश्री ने कहा कि जीवन के रूपांतरण की शुरुआत हमारी ‘दृष्टि’ से होती है। जब तक नजर बाहरी आकर्षणों और विकारों पर टिकी रहेगी, तब तक जीवन में भटकाव बना रहेगा। इसलिए दृष्टि को सुधारकर अंतरात्मा पर केंद्रित करना अनिवार्य है। अंतर्मुखी दृष्टि से ही तप का सच्चा अभिनंदन संभव है, जिससे आत्म-साधना प्रज्वलित होती है।

उन्होंने धर्म में दिखावे के प्रति सचेत करते हुए कहा कि प्रदर्शन के लिए किया गया दान या तप निष्फल रहता है। अहंकार से मुक्त होकर गुप्त रूप से किया गया निष्काम दान ही वास्तविक पुण्य का आधार बनता है। दूसरों के दोष देखने के बजाय स्वयं का निष्पक्ष और बारीक अवलोकन करना चाहिए, ताकि कथनी और करनी की दूरी मिट सके तथा वाणी छल-प्रपंच से मुक्त होकर सत्य बन सके।

धर्मसभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने मानव जीवन के मूल उद्देश्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानव भव अत्यंत दुर्लभ है और इसके उद्देश्य को समझना प्रत्येक जीव के लिए अनिवार्य है। केवल उदरपूर्ति करना और परिवार का विस्तार करना तो पशु-पक्षी भी कर लेते हैं। ईश्वर ने हमें यह अनमोल मानव देह इसलिए प्रदान की है, ताकि हम आत्म-जागृति के मार्ग पर चलकर अपने पूर्व संचित कर्मों का क्षय कर सकें और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकें।

इस धर्मसभा में पर्युषण पर्व को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए आत्म-मंथन, दृष्टि सुधार, निष्काम साधना और आचरण में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनाने का संदेश दिया गया। फोटो में खेरोदा में प्रवचन देते हुए मुनि श्री दिखाई दे रहे हैं। फोटो बुद्धि प्रकाश पाराशर, खेरोदा।

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