खैरवाड़ा स्थित श्री रुद्राणी महाकालिका शक्तिपीठ से निकली जवारों की शोभायात्रा के दौरान महंत भारत भूषण महाराज के साथ जवारे सिर पर धारण कर चलती महिला श्रद्धालु।

खैरवाड़ा, 21 अक्टूबर। श्री रुद्राणी महाकालिका शक्तिपीठ (किले वाली माताश्री) मंदिर से बुधवार को मां रुद्राणी की आज्ञा से जवारों की विशाल शोभायात्रा निकाली गई। पीठाधीश्वर महंत भारत भूषण महाराज के सानिध्य में निकली शोभायात्रा में महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।

शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने गरबा और रास के माध्यम से मां की स्तुति की। किले वाली माताश्री की महिमा का गुणगान करते हुए श्रद्धालु ‘किले वाली नो डंको वागै छे’, ‘पेली किला वाली डोसी मने लाड लडावे’, ‘किले वाली माता सबको निहाल करती’, ‘पेली रूद्राणी नाम नी चूंदड़ी मारे पेरवी छै’ और ‘अमर तू राखजे मां मां मारो चूड़ी ने चांदलो’ जैसे स्तवन गाते हुए मेवाड़ भील कोर सेतु पहुंचे। यहां जवारों के पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

पूजन के दौरान मुख्य यजमान अंकिता विवेक पंचाल परिवार, सागवाड़ा ने आरती प्रारंभ की। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर निराजन किया। महंत भारत भूषण महाराज ने जवारों को नमन किया। इसके बाद जवारों को कलालिया तालाब पर ले जाकर जल प्रवाहित कराया गया।

एमबीसी की स्थापना से चली आ रही परंपरा के अनुसार, शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने एमबीसी शस्त्रागार और जवानों की सुरक्षा के लिए परिक्रमा की। इसके बाद शोभायात्रा पुनः श्री रुद्राणी महाकालिका शक्तिपीठ पहुंची। मंदिर पहुंचने पर संरक्षक पंडित कृष्णगोपाल जोशी ने मां के विग्रह सहित सभी का स्वागत किया। उन्होंने आयोजन में शामिल लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और प्रसाद वितरण किया।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष बजरंग लाल अग्रवाल और महिला अध्यक्ष मंजु लक्षकार ने भी धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन में श्री रुद्राणी गरबा मंडल, श्री अंबाजी सेवा समिति, श्री गणपति नवयुवक मंडल, श्री शीतला माता मित्र मंडल और श्री बाबा रामदेव गरबा मंडल का सहयोग सराहनीय रहा। इसके साथ ही उपखंड प्रशासन, थानाधिकारी, एमबीसी और पीटीएस कमांडेंट तथा ग्राम पंचायत की सेवाओं की भी सराहना की गई। महंत भारत भूषण महाराज ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।

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