तस्वीर में जवास में आयोजित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के महामहोत्सव और धार्मिक विधान के दौरान बैठे हुए श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जवास में जिनशासन रक्षक यक्ष-यक्षी प्रतिष्ठापना तथा आदिनाथ निलयम वसतिका संत निवास शिलान्यास का महामहोत्सव धार्मिक आस्था के साथ आयोजित हुआ। आदिनाथ ट्रस्ट मंडल जवास तथा सहयोगी संस्था अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद ऋषभदेव के संयुक्त तत्वावधान में हुए आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 1400 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रीजी के दर्शन किए। आयोजन के दौरान जवास के मुस्लिम समुदाय ने स्वागत द्वार लगाकर श्रद्धालुओं को पानी की बोतलें वितरित कर सामाजिक सौहार्द की मिसाल भी पेश की।

कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर में नित्य अभिषेक से हुई। इसके बाद इन्द्र-इन्द्राणियों का स्वागत कर नूतन वेदी की प्रतिष्ठापना की गई। लीलावती देवी सुन्दरलाल किकावत परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद घोड़ों पर जैन ध्वज, बग्गियों, ढोल-बैंड के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पुरुष सफेद वस्त्र तथा महिलाएं लाल चुनरी में भक्ति गीतों पर नाचते-गाते नजर आए।

शोभायात्रा के बाद विधान मंडप में श्रीजी को विराजमान किया गया। मुख्य शिलान्यासकर्ता उषा देवी नरेन्द्र किकावत, रक्षक देव स्थापनाकर्ता भारती अंकुर मेहता, राजश्री दिलीप गांधी, नीलम प्रवीण वोरा, ममता अनंत कोठारी सहित विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों को मंच पर विराजित किया गया। इसके बाद आकार शुद्धि, इन्द्र एवं मंडल प्रतिष्ठा, महामंडल आराधना और शिला शुद्धिकरण सहित विभिन्न धार्मिक विधान संपन्न हुए। विभिन्न क्षेत्रों से आए समाज पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। ढोल-नगाड़ों के साथ श्रीजी एवं यक्ष-यक्षी की स्थापना की गई।

इसके बाद आदिनाथ निलयम वसतिका अर्थात संत निवास का शिलान्यास हुआ। सह शिलान्यासकर्ताओं में सीमा देवी धनपाल वोरा, कैलाश देवी निर्मल गांधी, मैना देवी कन्हैयालाल पंचोली एवं शान्तिलाल वेलावत परिवार शामिल रहे। मंदिर में प्राचीन खंडित प्रतिमाओं के संरक्षण के लिए संग्रहालय निर्माण का कार्य भी किया गया।

महामहोत्सव में ऋषभदेव, खेरवाड़ा, छाणी, नयागांव, बावलवाड़ा, विजयनगर, ईडर, बिछीवाड़ा, डूंगरपुर, देवल, कल्याणपुर, सेमारी, रठौड़ा, टोकर, परसाद, चावंड, सराड़ा, उदयपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन में 1400 से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रीजी के दर्शन किए।

मुस्लिम समुदाय ने पेश की सौहार्द की मिसाल

शोभायात्रा के दौरान जवास के मुस्लिम समुदाय की ओर से स्वागत द्वार लगाए गए और श्रद्धालुओं को पानी की बोतलें वितरित की गईं। धार्मिक आयोजन के दौरान मुस्लिम समुदाय की इस सहभागिता को क्षेत्र में आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल माना गया।

11-12वीं सदी का प्राचीन है जवास मंदिर

श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जवास को 11-12वीं सदी का प्राचीन अतिशय क्षेत्र बताया जाता है। मान्यता के अनुसार यहां की प्राचीन प्रतिमा से जुड़ी चमत्कारिक घटना के बाद जवास में जैन परिवारों का धीरे-धीरे विस्थापन हुआ और लंबे समय तक यहां कोई जैन परिवार नहीं रहा।

समय के साथ मंदिर उपेक्षित अवस्था में पहुंच गया। खेरवाड़ा निवासरत जैन परिवारों को मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने मंदिर के अस्तित्व की जानकारी दी। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई और संरक्षण के प्रयास शुरू हुए। ऋषभदेव निवासी श्रेष्ठी बृजभूषण नोगामा ने करीब 20 वर्षों तक मंदिर की देखरेख की। बाद में इसकी जिम्मेदारी खेरवाड़ा के श्रेष्ठी नाथुलाल किकावत को सौंपी गई।

अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद शाखा ऋषभदेव के सदस्य वर्ष 2012 से ऋषभदेव से जवास मंदिर तक पदयात्रा निकाल रहे हैं। वर्ष 2019 में मंदिर जीर्णोद्धार की शुरुआत की गई। मंदिर की घिसाई, मूल स्वरूप में पुनर्स्थापना, छत पर चाइना मोजेक, विद्युत एवं जल व्यवस्था, रंग-रोगन, मूल शिखर एवं गर्भगृह सहित विभिन्न कार्य साधर्मी बंधुओं के सहयोग से किए गए। इसके बाद मंदिर को ‘सौभाग्यधाम’ नाम दिया गया।

वर्ष 2025 में यहां जिनेन्द्र आराधना, ध्वजदंडारोहण, आकार शुद्धि विधान एवं नयनोन्मीलन महामहोत्सव का आयोजन हुआ। इसमें करीब 100 वर्ष बाद जवास में जैन धर्म की शोभायात्रा निकाली गई और एक हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए।

वर्तमान में अतिशय क्षेत्र जवास मंदिर का संचालन आदिनाथ ट्रस्ट मंडल जवास द्वारा किया जा रहा है, जिसमें खेरवाड़ा एवं ऋषभदेव युवा परिषद के सदस्य शामिल हैं। वर्ष 2026 में ट्रस्ट के माध्यम से रक्षक देवी-देवताओं की स्थापना तथा मंदिर के समीप भूमि लेकर संत निवास के शिलान्यास का कार्य किया गया। ट्रस्ट को आचार्य निर्भय सागर गुरुदेव, उपाध्याय शुभम सागर, मुनि सक्षम सागर, मुनि शैलनंदी एवं आर्यिका गणिनी प्रमुख ज्ञानमति माताजी का आशीर्वाद प्राप्त है।

ट्रस्ट अध्यक्ष भरत जैन एवं महामंत्री सचिन जैन गनोडिया के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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