तस्वीर में श्री महाकाल धाम कारछा में शिव विवाह के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप में बैठे श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

खेरवाड़ा स्थित श्री महाकाल धाम कारछा में आयोजित पांच दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का पंचम दिवस पूर्णाहुति और भव्य शिव विवाह समारोह के साथ श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा श्रवण किया और भगवान शिव की आराधना का धर्मलाभ प्राप्त किया।

कथा व्यास तिलकेश जोशी ने पंचम दिवस दक्ष प्रजापति के यज्ञ, माता सती के आत्मदाह तथा उमा के रूप में पुनर्जन्म लेकर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने भगवान शिव की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान शिव घट-घट में विराजमान हैं और सच्चे मन तथा श्रद्धा से उनकी आराधना करने से मनुष्य को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

कथा आयोजन समिति की ओर से बाबा महाकाल धाम के सेवायत सोहनलाल औदित्य ने कथा व्यास तिलकेश जोशी का तिलक एवं माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर बाबा महाकाल का अर्धनारीश्वर एवं रौद्र रूप में विशेष श्रृंगार किया गया।

कथा के दौरान हितेष जी विप्र, चंदन जी, चिराग जी एवं मोक्ष सोमपुरा ने विभिन्न वाद्य यंत्रों के माध्यम से संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों से कथा स्थल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए। शिव विवाह से पूर्व आयोजन में सहयोग देने वाले दानदाताओं एवं समिति के सेवकों का उपरना एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।

वैदिक विधि-विधान से हुआ शिव विवाह

पूर्णाहुति के अवसर पर आचार्य अजय कुमार भट्ट ने मंत्रोच्चार एवं वैदिक विधि-विधान के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती का शिव विवाह समारोह सम्पन्न कराया। शिव विवाह में भगवान शिव एवं माता पार्वती के प्रतीक स्वरूप रामलाल पटेल एवं उनकी धर्मपत्नी पुष्पा बेन फुटाला ने भूमिका निभाई।

विवाह समारोह में श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्तिभाव के साथ भाग लिया। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल रहा और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। शिव विवाह के पश्चात महावीर जांगिड़ के परिवार की ओर से समस्त धर्मप्रेमियों के लिए मां अन्नपूर्णा के रूप में भंडारे की व्यवस्था की गई।

कार्यक्रम का संचालन घनश्याम जोशी ने किया। आयोजन समिति ने श्री शिव महापुराण कथा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, दानदाताओं एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। पांच दिवसीय कथा का समापन शिव विवाह, पूर्णाहुति और भंडारे के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की सहभागिता प्रमुख रही।

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