खेरोदा में चातुर्मास के दौरान कोमल मुनि का संदेश, कहा- मोबाइल संस्कृति आज की सबसे बड़ी त्रासदी
खेरोदा में चातुर्मास के दौरान कोमल मुनि ने मोबाइल संस्कृति को आज की बड़ी त्रासदी बताया और साधना को सुख का सच्चा मार्ग बताया।
तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित चातुर्मास के दौरान मंच पर विराजमान जैन संत और नीचे बैठे हुए श्रावक-श्राविकाएं दिखाई दे रहे हैं।
गुरुदेव कोमल मुनि ने आज के समय की विसंगतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी त्रासदी हमारी आदतें बन चुकी हैं। सुबह उठते ही इंसान सबसे पहले मोबाइल हाथ में लेता है, तो ऐसे में चेहरे पर सच्ची मुस्कान कैसे आ सकती है। जो समय अपनों को नमस्कार करने, प्रभु का स्मरण करने और परिवार में प्रेम बांटने का था, वह आज स्क्रीन की आभासी दुनिया को सौंप दिया गया है। मोबाइल की सूखी और बेजान स्क्रीन में लोग सुख तलाश रहे हैं, जबकि वहां केवल भ्रम के अलावा कुछ नहीं है।
संसाधनों और सुख की परिभाषा समझाते हुए पूज्य मुनि श्री ने कहा कि आज हमारी स्थिति ऐसी हो गई है कि भौतिक संसाधनों को पाने की अंधी लालसा में जीवन की असली आशा ही खत्म होती जा रही है। समाज ने यह मान लिया है कि जितने अधिक साधन होंगे, सुख उतना ही बड़ा होगा, लेकिन सुख कभी भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि केवल साधना में होता है। जीवन से निराशा को सदा के लिए दूर करने का एकमात्र मार्ग साधना ही है।
उन्होंने कहा कि सत्य को समझने के लिए दिखावे के नारे लगाने के बजाय गुणग्राही सच्चा भक्त बनना होगा, जो हर जगह से अच्छे गुणों को आत्मसात करे।
इस अवसर पर सेवा रत्न हर्षित मुनि जी ने श्रावक-श्राविकाओं को 21 गुणों का बोध कराते हुए विशेष संदेश दिया कि सभी को धर्म के प्रति सदैव आगे रहना चाहिए। उन्होंने जीवन में धन पिपासु यानी धन के पीछे भागने वाला बनने के बजाय धर्म पिपासु यानी धर्म की प्यास रखने वाला बनने का संदेश दिया।
वर्द्धमान जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष सुनील कूकड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि चातुर्मास के इन पावन दिनों में धर्माराधना का यह क्रम निरंतर जारी है, जिससे बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं लाभान्वित हो रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान जैन संतों के प्रवचनों के माध्यम से मानव जीवन की सार्थकता, विनम्रता, साधना और धर्म के महत्व के साथ बदलती जीवनशैली में मोबाइल संस्कृति के प्रभाव पर संदेश दिया जा रहा है।