इंदौर में एक कमरे में हुआ चातुर्मास कलश स्थापना समारोह, सादगी बनी मिसाल
इंदौर में परम पूज्य मुनिश्री सिद्धान्त सागरजी मुनिराज के वर्षायोग 2026 की मंगल कलश स्थापना एक कमरे में सादगी से हुई। बिना बैनर, मंच और आयोजन व्यवस्था के हुए इस अनोखे चातुर्मास की चर्चा।
तस्वीर में मुनिश्री सिद्धांत सागरजी महाराज लकड़ी के आसन पर विराजमान नजर आ रहे हैं।
इंदौर (मध्यप्रदेश)। देवी अहिल्या की पावन नगरी इंदौर में वर्षायोग 2026 की मंगल कलश स्थापना का आयोजन अद्भुत सादगी के साथ सम्पन्न हुआ। परम पूज्य वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागरजी मुनिराज के सुयोग्य शिष्य महान तपस्वी संत परम पूज्य मुनिश्री सिद्धान्त सागरजी मुनिराज का चातुर्मास एक कमरे में कुछ मुनि भक्तों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
गोमट गिरी के सामने स्थित आकाश ग्रीन कॉलोनी में चातुर्मास पुण्य स्थल श्री मनोजजी सपना जी मोदी के निजनिवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में बिना किसी बैनर, पोस्टर, पांडाल बोली, मंच, माला और माइक के केवल सादगीपूर्ण तरीके से मंगल कलश स्थापना की गई। पंच परमेष्ठी के प्रतीकात्मक रूप में केवल पांच मंगल कलश स्थापित किए गए।
सम्पूर्ण चातुर्मास के दौरान पूज्य मुनिश्री की आहारचर्या सुबह 10 बजे सम्पन्न होगी। इसके बाद कुछ समय तक भक्तों को आशीर्वाद एवं तत्व चर्चा प्रदान करने के पश्चात मुनिश्री 22 घंटों के लिए अपनी साधना और तपस्या में लीन हो जाएंगे। अगले दिन पुनः सुबह 10 बजे इसी क्रम के अनुसार धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न होंगी।
इस संबंध में इंदौर के गांधीनगर निवासी शैलेश काला ने राष्ट्र गौरव पारस जैन "पार्श्वमणि" पत्रकार कोटा को जानकारी प्रदान की। पारस जैन "पार्श्वमणि" ने बताया कि परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागर जी महा मुनिराज का यह 43वां चातुर्मास है।
उन्होंने बताया कि एक बार जब वे परम पूज्य मुनिश्री सिद्धांत सागर जी महाराज के दर्शन करने गए थे, तब मुनिश्री ने उनसे भजन सुनाने के लिए कहा। उन्होंने भावपूर्ण होकर "आगे आगे अपनी ही अर्थी के गाता चलू" भजन प्रस्तुत किया, जिस पर मुनिश्री ने पिच्छिका से उन्हें खूब-खूब आशीर्वाद प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने पांच और भजन सुनाए।
पारस जैन "पार्श्वमणि" ने कहा कि ऐसे मुनिराज की तप, त्याग और साधना वंदनीय है। उनके सादगीपूर्ण आचरण, अटूट वात्सल्य, करुणा, प्रेम और स्नेह को देखकर मन श्रद्धा से भर गया। चातुर्मास स्थापना का यह आयोजन सादगी और आध्यात्मिक साधना का विशेष उदाहरण बनकर सामने आया।
प्रस्तुति
पारस जैन "पार्श्वमणि" पत्रकार कोटा (राज)
9414764980