गुरु वंदन से गूंजा विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय, 40 गुरुजनों और 4 प्रतिभाशाली छात्रों का सम्मान
ऋषभ देव के विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक दिवस पर भारत विकास परिषद् ने गुरु वंदन छात्र अभिनंदन समारोह आयोजित किया। 40 गुरुजनों, 4 प्रतिभाशाली छात्रों और 500 विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।
तस्वीर में विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय में आयोजित गुरु वंदन छात्र अभिनंदन समारोह का पोस्टर दिख रहा है, जिसमें स्वामी विवेकानंद की तस्वीर, कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और उपस्थित पदाधिकारियों की सूची दी गई है। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
भारत विकास परिषद् ऋषभ देव शाखा की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय में गुरु वंदन छात्र अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में 40 गुरुजनों और 4 प्रतिभाशाली बालकों सहित कुल 500 छात्रों का अभिनंदन एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विद्यालय की प्रिंसिपल पद्मिनी नायडू थीं, जिनका परिषद की ओर से गुरु वंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री प्राण भाणावत ने की। मुख्य वक्ता प्रान्तीय प्रकल्प प्रभारी श्री आनंद मेहता ने भगवान श्री कृष्ण को विश्व गुरु बताते हुए गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरुजनों का सम्मान करने का संकल्प भी दिलाया।
समारोह में परिषद के वरिष्ठ सदस्य धीरज त्रिवेदी, बसंतजी किकावत, दिलीप जी भानावत, संस्कार संयोजक हेमंत जी भवरा, जिंदत्त जी जैन, अमित जैन, अखिलेश मलासिया, योगेश वागावत, मिथुन कोठारी और अविनाश भानावत उपस्थित रहे। महिला सहभागिता की ओर से प्रतिमा पंचाल, सीमा जैन, डिंपल कोठारी, वासुमती जैन और मुक्ता जैन ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राण जी भानावत ने की, जबकि संचालन प्रांत प्रभारी आनंदजी मेहता ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव रवि पंचाल की ओर से किया गया। समारोह के दौरान उपस्थित समस्त गुरुजनों से आग्रह किया गया कि वे गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करें।
परिषद के सभी सदस्यों ने विद्यालय स्टॉफ को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। विवेकानंद केंद्रीय विद्यालय की ओर से नवीन जी व्यास ने आभार व्यक्त किया। वहीं सचिव रवि पंचाल ने विद्यालय एवं संस्थान का आभार प्रकट किया। समारोह में गुरुजनों के सम्मान और विद्यार्थियों के अभिनंदन के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा के निर्वहन का संदेश दिया गया।