उदयपुर की 10 वर्षीय मायर्रा त्यागी ने एशियन आइस स्केटिंग में बढ़ाया मान
सीबीएसई वेस्ट जोन में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद 10 वर्षीय मायर्रा त्यागी ने 14 देशों की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में देश का नाम रोशन किया।
तस्वीर में दिख रही मायर्रा त्यागी गले में पदक पहने हाथ में खिलौने लिए खड़ी हैं।
उदयपुर की 10 वर्षीय मायर्रा त्यागी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाया, एशियन आइस स्केटिंग प्रतियोगिता में 14 देशों के खिलाड़ियों के बीच अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया। स्केटिंग के क्षेत्र में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही मायर्रा ने कम उम्र में ही मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से उल्लेखनीय पहचान बनाई है।
उदयपुर, 05 सितम्बर। मायर्रा ने एशियन आइस स्केटिंग प्रतियोगिता में 14 देशों के प्रतिभागियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों के बीच उतरकर मायर्रा ने आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा की और अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए देश का गौरव बढ़ाया।
इससे पहले एसआरएन इंटरनेशनल स्कूल, जयपुर में आयोजित सीबीएसई वेस्ट जोन रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता में भी मायर्रा ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता की दो प्रमुख स्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ विद्यालय और उनके प्रशिक्षकों में भी खुशी है।
मायर्रा की सफलता सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं है। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा को सही दिशा, निरंतर अभ्यास और परिवार व प्रशिक्षकों का सहयोग मिले तो उम्र सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।
मायर्रा के खेल प्रदर्शन में उनकी कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा का अनुभव उनके खेल करियर के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
मायर्रा की उपलब्धियों से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। विद्यालय और प्रशिक्षकों ने भी उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की शुभकामनाएं दीं।
उदयपुर की इस नन्ही खिलाड़ी की उपलब्धि शहर के लिए भी गर्व का विषय है। मायर्रा की कहानी उन बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनका अभ्यास और प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले वर्षों में मायर्रा देश के लिए बड़े मंचों पर पदक जीतने वाली खिलाड़ियों की कतार में अपना स्थान बना सकती हैं।