कामवन में विजयमती माताजी के नाम पर सर्किल की मांग तेज, जैन समाज ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
डीग के कामवन में जैन समाज ने प्रथम गणिनी आर्यिका रत्न विजयमती माताजी के नाम पर सर्किल बनाने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
डीग जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में जैन समाज के प्रतिनिधि जिला कलेक्टर मयंक मनीष को ज्ञापन सौंपते हुए।
डीग जिले की धर्मनगरी कामवन में जैन धर्म की प्रथम गणिनी आर्यिका रत्न पूज्य विजयमती माताजी की स्मृति को स्थायी सम्मान देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। सकल दिगम्बर जैन समाज कामवन ने 10 जुलाई को जिला कलेक्टर मयंक मनीष को विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए एक प्रमुख सर्किल अथवा चौराहे का निर्माण कर उसका नाम "प्रथम गणिनी आर्यिका रत्न विजयमती माताजी सर्किल" रखने की मांग की। इसी क्रम में जुरहरा जैन समाज ने भी अलग से ज्ञापन देकर इस मांग का समर्थन करते हुए जिला प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।
सकल दिगम्बर जैन समाज कामवन के अध्यक्ष अनिल जैन लहसरिया ने कहा कि डीग जिला अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि इसी जिले की धर्मनगरी कामवन, जहां ब्रज संस्कृति के साथ-साथ जैन धर्म की भी गौरवशाली परंपरा रही है, जैन धर्म की प्रथम गणिनी आर्यिका रत्न विजयमती माताजी की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। ऐसी महान संत विभूति की स्मृति में आज तक किसी प्रमुख चौराहे अथवा सर्किल का नामकरण नहीं होना क्षेत्र की जनभावनाओं के अनुरूप नहीं है।
युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं कामां निवासी उदयभान जैन बड़जात्या ने बताया कि मांग पत्र में उल्लेख किया गया है कि पूज्य विजयमती माताजी ने अपने तप, त्याग, वैराग्य, संयम एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से जैन धर्म के मूल सिद्धांतों—अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम और सदाचार—का देशभर में व्यापक प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने सम्पूर्ण भारतवर्ष के प्रत्येक प्रांत के तीर्थ क्षेत्रों का पद विहार कर दर्शन किए तथा जन-जन तक अहिंसा का संदेश पहुंचाया। उनका जीवन केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत रहा। उन्होंने अपने आध्यात्मिक व्यक्तित्व और आदर्श जीवन से समाज को नई दिशा प्रदान करते हुए नारी शक्ति, संयम और संस्कृति के उच्च आदर्श स्थापित किए।
संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि आर्यिका रत्न विजयमती माताजी की जन्मभूमि कामवन है और उन्होंने सम्पूर्ण देश में जैनत्व के उत्थान तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। उन्होंने लाखों लोगों को संयम और धर्म का मार्ग अपनाने के लिए संबल प्रदान किया। यह केवल कामवन ही नहीं, बल्कि पूरे भरतपुर संभाग और डीग जिले के लिए भी गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को ऐसी महान विभूति के जीवन, त्याग और तपस्या से प्रेरणा मिले, इसके लिए उनके नाम पर एक भव्य सर्किल या चौराहे का निर्माण एवं नामकरण किया जाना आवश्यक है।
ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि कामवन का वह प्रमुख चौराहा, जहां से बोलखेड़ा, कोसी, पहाड़ी एवं जुरहरा मार्ग की ओर आवागमन होता है, सर्किल के निर्माण एवं नामकरण के लिए उपयुक्त स्थान हो सकता है। इससे क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नई गरिमा मिलेगी तथा श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी कामवन की आध्यात्मिक विरासत की जानकारी प्राप्त होगी।
जैन समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिला प्रशासन इस ऐतिहासिक मांग को स्वीकार कर धर्मनगरी कामवन की गौरवशाली विरासत को स्थायी सम्मान प्रदान करेगा।
इस अवसर पर मांग पत्र सौंपने वालों में उदयभान जैन (राष्ट्रीय महामंत्री, जैन पत्रकार महासंघ), वीरेंद्र जैन (अध्यक्ष, डीग जैन समाज), ओमप्रकाश जैन (अध्यक्ष, सीकरी), संजय जैन बड़जात्या, संजय सर्राफ (कामवन), पुष्पेंद्र जैन (सीकरी), तरुण जैन (जुरहरा) और शीतल जैन (कुम्हेर) सहित जैन समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जुरहरा जैन समाज के प्रतिनिधियों ने भी अलग से ज्ञापन देकर विजयमती माताजी के नाम पर सर्किल अथवा चौराहे के नामकरण की मांग दोहराते हुए प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।