तस्वीर में खेरवाड़ा में सीबीईओ कार्यालय के बाहर टेंट के नीचे अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे कुक कम हेल्पर दिखाई दे रहे हैं।

खेरवाड़ा, केसरियाजी और नयागांव क्षेत्र के कुक कम हेल्परों ने अपनी मांगों के समर्थन में कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को पोषाहार पकाने का बहिष्कार कर प्रदर्शन किया। 24 से 26 अगस्त तक प्रस्तावित कार्य बहिष्कार के तहत कुक कम हेल्परों ने सीबीईओ कार्यालय के बाहर पड़ाव डाला, रैली निकाली और उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

पड़ाव स्थल पर आयोजित सभा में कुक कम हेल्परों ने अपने-अपने विद्यालयों से जुड़ी समस्याएं रखीं। उन्होंने एक वर्ष से दूध गर्म करने तथा पांच माह से पोषाहार पकाने का मानदेय नहीं मिलने पर आक्रोश जताया। सभा के बाद कुक कम हेल्परों ने बस स्टैंड और पुलिस थाना होते हुए जुलूस निकाला और उपखंड कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसके बाद उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन सौंपने के बाद जुलूस एमबीसी, जवास बस स्टैंड, मोचीवाड़ा और पुराने बस स्टैंड से होकर पुनः पड़ाव स्थल पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान कुक कम हेल्परों ने “कुक कम हेल्पर को स्थायी करो”, “67 रुपये दैनिक मजदूरी में बेगार बंद करो”, “पेंशन-ग्रेच्युटी दो” और “हम हमारा हक मांगते हैं” सहित विभिन्न नारे लगाए।

ज्ञापन में कुक कम हेल्परों को केरल की तर्ज पर 13,500 रुपये मासिक वेतन देने, नियुक्ति एवं पहचान पत्र जारी करने, वर्दी देने, प्रत्येक 50 विद्यार्थियों पर एक कुक नियुक्त करने तथा वेतन का प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने की मांग की गई। इसके साथ ही स्थायीकरण, पेंशन-ग्रेच्युटी, प्रसूति एवं अन्य अवकाश, दूध गर्म करने का मानदेय बढ़ाने और बीमा की मांग भी रखी गई।

कुक कम हेल्परों ने 45वीं इंडियन लेबर कांफ्रेंस के प्रस्ताव लागू कर मजदूर का दर्जा देने, 12 माह का वेतन देने तथा पोषाहार पकाने के अतिरिक्त सफाई, झाड़ू, स्कूल खोलने-बंद करने सहित अन्य कार्यों के लिए अतिरिक्त भुगतान की मांग की। ज्ञापन में सरकारी स्कूल बंद नहीं करने और जर्जर विद्यालय भवनों के लिए तत्काल बजट आवंटित करने की मांग भी शामिल रही।

पड़ाव और जुलूस में जनवादी मजदूर यूनियन खेरवाड़ा-केसरियाजी के संरक्षक डीएस पालीवाल तथा मजदूर किसान हक संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कुक कम हेल्परों के कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन के जरिए मानदेय, स्थायीकरण, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यों के अनुरूप भुगतान सहित विभिन्न मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा गया।

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