उदयपुर के हरिहर धाम बदराणा में आषाढ़ी तोल की परंपरा संपन्न, वर्षा और समृद्धि को लेकर हुआ बड़ा अनुमान
उदयपुर जिले के झाड़ोल स्थित अति प्राचीन भगवान श्री हरिहर मंदिर, हरिहर धाम बदराणा में सैकड़ों वर्षों पुरानी आषाढ़ी तोल की परंपरा संपन्न हुई। तेरह प्रकार की वस्तुओं और अनाज के पुनः तोल के बाद वर्षा, मानवधन, पशुधन और व्यापार को लेकर परंपरागत अनुमान सामने आए।
तस्वीर में उदयपुर जिले के झाड़ोल तहसील स्थित हरिहर धाम बदराणा मंदिर में भगवान श्री हरिहर की विशेष रूप से श्रृंगारित मूर्ति और आसपास सजी पूजन सामग्री दिखाई दे रही है।
उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील स्थित अति प्राचीन भगवान श्री हरिहर मंदिर, हरिहर धाम बदराणा में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही आषाढ़ी तोल की पारंपरिक धार्मिक परंपरा इस वर्ष भी विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। हरिहर धर्म महोत्सव समिति के अध्यक्ष अमर सिंह झाला बदराणा ने बताया कि पौराणिक परंपरा के अनुसार प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ पूर्णिमा के दिन भगवान श्री हरिहर का विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना करने के बाद तेरह प्रकार की वस्तुओं और अनाज का तोल किया गया।
उन्होंने बताया कि यह तोल पुराने चांदी के तोले से किया गया। केसरिया कपड़े में सबका राजा सबरस (नमक), गेहूं, चावल, कांगणी, उड़द, कपास, तिल्ली, त्रण (घास), मक्का, चना, जौ, कालीमाटी और पीलीमाटी को समान मात्रा में तौलकर अलग-अलग केसरिया कपड़ों में बांधा गया। इसके बाद सभी वस्तुओं को मिट्टी के अलग-अलग कलशों में रखकर सबके सामने कलश को बांधते हुए भगवान श्री हरिहर के चरणों में अर्पित कर दिया गया।
एक दिन बाद श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा संवत 2083 के दिन भगवान श्री हरिहर का विशेष श्रृंगार एवं पूजा-अर्चना के पश्चात कलश को श्रद्धालुओं की उपस्थिति में खोला गया। इसके बाद तेरहों प्रकार की वस्तुओं और अनाज का पुनः जौका (तोल) किया गया। इस दौरान मक्का, चना, जौ और कालीमाटी में एक रत्ती की बढ़त पाई गई। वहीं सबरस (नमक), गेहूं, चावल, कांगणी, उड़द, कपास, त्रण (घास) और तिल्ली समतौल अर्थात बराबर पाए गए, जबकि इस बार पीलीमाटी में घटत दर्ज की गई।
आषाढ़ी तोल की परंपरा के अनुसार मक्का, चना, जौ और कालीमाटी में बढ़त होने से आगामी वर्षा बहुत अच्छी रहने का संकेत माना गया। वहीं सबका राजा सबरस (नमक) समतौल रहने से पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष वर्षा बराबर रहने का अनुमान व्यक्त किया गया। कालीमाटी में बढ़त को मानवधन और पशुधन में बीमारी एवं महामारी नहीं होने का संकेत माना गया, जिससे वर्ष अच्छा रहने का अनुमान लगाया गया। दूसरी ओर पीलीमाटी में घटत होने के कारण सामान्य व्यापार तथा धातु (जेवरात) व्यापार में कमी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया।
हरिहर धर्म महोत्सव समिति के अध्यक्ष अमर सिंह झाला बदराणा ने बताया कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार आज तक हरिहर मंदिर में होने वाला आषाढ़ी तोल कभी गलत साबित नहीं हुआ है।
आषाढ़ी तोल के कार्यक्रम में मंदिर के बड़े मुखिया चंद्रकांत सांचीहर, पूर्व राजपरिवार के अमर सिंह झाला बदराणा, भेरूलाल लोहार, तुलसीदास सांचीहर, माधव सांचीहर, निखिल सांचीहर सहित आसपास के सैकड़ों किसान और भक्तजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जैसे-जैसे अनाज में बढ़त और समतौल की घोषणा होती रही, वैसे-वैसे उपस्थित किसान और श्रद्धालु भगवान श्री हरिहर, इंद्रदेव और गिरिराज धरण के जयकारों से पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण में गुंजायमान करते रहे।